जन-जन के संत भाग - 33
जन-जन के संत भाग - 33 मूक प्राणियों के प्रति करुणा भाव वैसे तो संत शब्द ही करुणा और वात्सल्य का पर्यायवाची होता है। पूज्य गुरुदेव के हृदय में मूक प्राणियों के प्रति सदैव करुणा का भाव रहा है। अनेक बार गर्मी में विहार (भ्रमणध्यात्रा) के दौरान मूक निर्जीव प्राणियों को कमंडल से जल पिलाते हुए गुरुदेव को देखा गया है। इसी तरह पदयात्रा के दौरान रास्ते में कोई बीमार जानवर मिल जाये, तो गुरुदेव तुरंत रुककर उसे कमंडल से जल पिलाते हुए मंत्र उच्चारण के साथ उसके विधिवत उपचार की व्यवस्था करवाते हैं। गुरुदेव के भक्त बताते हैं कि अनेक बार उनके विहार के समय जीव-जंतु साथ चलते देखे गए हैं। गुरुदेव कहते हैं- सेवा और वात्सल्य की ज़रूरत इंसान के अलावा इन पशुओं को भी है। जो इंसान इन मूक प्राणियों से स्नेह नहीं करता, असली पशु तो वही है। मूक प्राणियों के लिये, हिय में दया अपार, धन्य आपकी भावना, धन्य आप सरकार। लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद सागर (म.प्र.) मो. 91 93009 34766 क्रमशः ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख ...