जन-जन के संत भाग - 14
जन-जन के संत भाग - 14 जनसंत होने के कारण संत होना ही अपने आप में महत्वपूर्ण होता है। फिर जनसंत होने का पीछे क्या कारण रहे होंगे ? यह उपाधि किसी दिगम्बर जैन मुनि को क्यों प्रदान की गई होगी ? यह अवगत कराना जरूरी है। बात क्षुल्लक अवस्था की है। जब पूज्य गुरुदेव धर्म प्रभावना के लिए जगह-जगह चातुर्मास कर रहे थे। सम्पूर्ण मानव समाज के प्रति सार्थक और कल्याण की सोच, राष्ट्र के प्रति भक्ति आपको जन-जन के बीच ख्याति दिला रही थी। आपके द्वारा किये गए विशेष प्रयासों से सिर्फ जैन ही नहीं, बल्कि सर्व समाज लाभान्वित होती थी। सबसे अच्छी बात यह थी कि आपके दरवाजे हर व्यक्ति के लिए सामान्य रूप से खुले रहते थे। निज साधना के अतिरिक्त जो अल्प समय शेष था, उसे पूज्य गुरुदेव जन सामान्य के कल्याण की चर्चा में व्यतीत करते थे। यही कारण था कि आपके इन विशेष प्रयासों से आपकी ख्याति बच्चों से लेकर बुजुर्गों में, जैन से लेकर जैनेतर समाज में बढ़ने लगी। आपकी मानव समाज के प्रति इसी सार्थक सोच ने आपको जनसंत की उपाधि प्रदान करा दी, जो सिर्फ आपका नहीं बल्कि संत समाज का भी सम्मान था। यह भी सत्य है कि दिगम्बर मुद्रा ...