जन-जन के संत भाग - 34
जन-जन के संत भाग - 34 महान योगी हैं गुरुदेव जैन संत की चर्या एक योगी की चर्या है। ब्रह्ममुहूर्त में उठना, सात्विक खान पान, अनुशासित दिन-चर्या और नियत समय पर सोना-जागना एक प्रकार का योग ही है। गुरुदेव विरंजनसागर जी महाराज ने इसी योग रुपी साधना से अपने शरीर को ऐसा साधा कि मधुमेह और पथरी की समस्या होते हुए भी काया पर बीमारियों को हावी नहीं होने दिया। वे अपने कक्ष में प्रातः कठिन योग की मुद्राओं में दिखाई देते हैं। शायद यही कारण है कि वे बीमारियों को हराकर एक निरोगी देह के साथ अपनी संयमित चर्या में जुटे हुए हैं। गुरुदेव की योग साधना योगचार्यों को भी चकित करती है। नियम साधना ध्यान से, हार गये सब रोग, संयम चर्या योग के, मुनिवर हैं संयोग। लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद सागर (म.प्र.) मो. 91 93009 34766 क्रमशः ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अध...