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जन-जन के संत भाग - 59

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     जन-जन के संत  भाग - 59   कमजोरी हो गई छू मन्तर... बड़ामलहरा जिला छतरपुर निवासी कुमारी प्रगति जैन पिता मुकेश जैन जी, की अचानक बेहद तबियत खराब हो गई। दो तीन महीने से भूख लगना बन्द हो गई, जिससे शरीर में बेहद कमजोरी आने लगी। चिकित्सकों का इलाज भी चल रहा था, पर उम्मीद के अनुसार आराम नहीं लग रहा था। आपके पूरे परिवार की पूज्य गुरुदेव विरंजन सागर जी के प्रति पूर्ण श्रद्धा और भक्ति है। अतः परिवार के साथ पूज्य गुरुदेव के दर्शन को गई और पूरी समस्या बताई। पूज्य गुरुदेव ने आशीष दिया और एक जाप करने को कहा। प्रगति बिटिया की मां बताती हैं कि जैसे कोई चमत्कार हुआ हो और उनकी बिटिया पूर्ण स्व स्थ  हो गई और आज तक कोई दिक्कत नहीं आई। बिटिया और उनके माँ पिता की खुशी का ठिकाना नहीं था। वे दोनों कहते हैं पूज्य गुरुदेव के हमारे पूरे परिवार पर कई उपकार हैं। जिनका ऋण चुकाया नहीं जा सकता है। गुरु आशीष से तंदुरुस्त, रोगी जन हो जाँय,   बड़भागी हैं भक्त जन, गुरु की पकड़ी छाँय। लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद सागर (म.प्र.) मो. 91 93009 34766 क्रमशः ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा...

जन-जन के संत भाग - 58

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     जन-जन के संत  भाग - 58   सामूहिक मांस मदिरा का त्याग   वर्ष 2016 में आप ससंघ खड़ेरी, जिला दमोह में विराजमान थे। आपकी धर्म प्रभावना के कारण आपकी प्रवचन सभा में लगातार दूर गाँव से जैनों के अलावा अन्य जाति-वर्ग के लोग भी आकर आपका दर्शन-लाभ लिया करते थे। एक रोज आप शाकाहार की महत्ता पर उपदेश दे रहे थे। सभा में गाँव के यादव और अन्य जाति-वर्ग के लोग मौजूद थे। आपके उपदेश सुनकर उपस्थित लोगों की आँखें भर आईं और उन्होंने सामूहिक रूप से सभा में ही प्रवचन उपरांत आजीवन मांस-मदिरा का त्याग कर आपका आशीष प्राप्त किया और कहा कि उनके परिवार आज से अहिंसा धर्म को अपनाएंगे। व्यक्ति के मन का यह परिवर्तन अहिंसा धर्म की जीत का परिचायक है। दया अहिंसा श्रेष्ठ है, यही धर्म का सार। गुरुवर करते जा रहे, करुणा का विस्तार। लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद सागर (म.प्र.) मो. 91 93009 34766 क्रमशः ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विच...

जन-जन के संत भाग - 57

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     जन-जन के संत  भाग - 57   गुरुकृपा से हुई निरोगी काया... रामटोरिया के निवासी विकास जैन उम्र 21 वर्ष के पूरे शरीर में लंबे समय से सूजन रहने लगी। स्थानीय चिकित्सकों के अलावा बाहर के चिकित्सकों को दिखाया, उपचार लिया। पर बीमारी दूर नहीं हुई। तब वे परेशान होकर परिवार के साथ पूज्य गुरुदेव के पास गए और अपनी व्यथा सुनाई। गुरुदेव ने सुनकर आशीर्वाद दिया और कहा - कहीं मत जाओ। अब बिल्कुल ठीक हो जाओगे। कुछ ही दिन में चमत्कार हुआ और विकास जैन का शरीर पूर्ण स्व स्थ  हो गया। उनका परिवार गुरु के इस चमत्कार के प्रति कृतज्ञ है। मानव तन है अनगिनत, आधि व्याधि की खान, किस किस ने पाया नहीं, गुरु से सहज निदान। लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद सागर (म.प्र.) मो. 91 93009 34766 क्रमशः ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद   

जन-जन के संत भाग - 55

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     जन-जन के संत  भाग - 55   गुरु के आशीष से भक्त के पैरों में आई जान... जहां श्रद्धा और भक्ति हो वहां चमत्कार निश्चित होते हैं। शाहगढ़ निवासी श्रीमती वंदना जैन उम्र 32 वर्ष जिन्हें पैरों की हड्डियों में विसंगति के कारण चलने में बहुत ही दिक्कत होने लगी। उन्हें पैर खिसकाने में भी बहुत तकलीफ होती थी। बहुत से विशेषज्ञ डॉक्टरों को दिखाने के बाद भी आराम नहीं मिला तब वे गुरुदेव के पास पहुंची और अपनी तकलीफ बताई, गुरुदेव ने भक्त की पीड़ा देख आशीष दिया और एक जाप बतलाया। कुछ ही दिनों में वे पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर आराम से चलने फिरने लगी। इसे कहते हैं गुरुकृपा। चलने में असमर्थ थी, भक्त वंदना जैन।   गुरुकृपा से मिट गया, चंद दिनों में पैन।। लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद सागर (म.प्र.) मो. 91 93009 34766 क्रमशः ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-...

जन-जन के संत भाग - 56

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     जन-जन के संत  भाग - 56   और डॉक्टर साहब हो गये प्रसन्न... ऐसी है गुरु कृपा डॉ. अखिलेश जैन जी सागर मध्यप्रदेश के जाने माने पल्मोनोलॉजिस्ट हैं। जनसंत विरंजन सागर जी के प्रति आपके पूरे परिवार की गहरी आस्था है। आप बताते हैं कि वैसे तो सदा ही गुरुकृपा का प्रसाद पूरे परिवार को मिलता आया है। गुरु आशीष ने हमेशा ही मेरी रक्षा की है, और पीड़ित मानवता की सेवा में अग्रसर होने के लिए प्रेरणा दी है। किंतु एक विशेष घटना या चमत्कार को बताते हुए उन्होंने कहा कि सागर चातुर्मास में गुरुदेव की कलश स्थापना में श्रोताओं में बैठा था। तभी कलश स्थापित करने के लिए मंच से कलशों की जानकारी दी गई। मंच पर बैठे हुए गुरुदेव की मधुर मुस्कान ने जैसे कहा हो कि अखिलेश एक कलश तुम्हें लेना है। गुरु की अमृतम मुस्कान का आदेश मेरे लिए सर्वोपरि था। मैंने तुरंत दान का भाव बनाते हुए एक कलश की घोषणा कर दी। शाम को गुरुदेव ने कमरे में मुझसे कहा - डॉक्टर तुमने आज दान की प्रासंगिकता को सिद्ध किया है। श्री जी तुम्हें वह देंगे, जो तुमने कल्पना नहीं की होगी। आप बताते हैं, पूरे सात दिनों बाद एक संस्था से एक ब...

जन-जन के संत भाग - 54

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     जन-जन के संत  भाग - 54   गुरुकृपा से ठीक हुआ असाध्य रोग... हिसार हरियाणा निवासी श्री पीयूष गोयल परम् मुनि भक्त हैं। उनके पिता श्री गम्भीर बीमारी से अस्पताल में भर्ती थे। चिकित्सकों द्वारा समस्त जांच परीक्षण उपरांत जब स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ तो चिकित्सकों ने कहा -अब कुछ नहीं किया जा सकता। आप लोग पिता जी को घर ले जाएं। अब ठीक होने की कोई भी उम्मीद शेष नहीं है। ऐसे में पीयूष जी रोते हुए जनसंत विरंजन सागर जी के पास गए और गुरुदेव को पूरी कहानी सुनाई। पिता जी के स्वास्थ्य सुधार हेतु विनती की। गुरुदेव ने अपने भक्त को सम्बल देते हुए कमंडल का पानी दिया और कहा कि जाओ और णमोकार मन्त्र पढ़कर पिताजी के मुँह में यह पानी डालो। पानी मुंह में जाते ही चमत्कार हुआ। पूरे दो दिवस बाद पिताजी स्वस्थ्य होकर घर वापिस आ गए। इसे श्रद्धा कहें या गुरु कृपा या कोई चमत्कार। पर भक्त की खुशी का ठिकाना तो वही जान सकता है। यह है गुरु की असली कृपा। अचरज कितना हम करें, अतिशय गुरु का देख।   गुरुकृपा से मिट गये, अशुभ कर्म के लेख। । लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद सागर (म.प्र.) मो. 91 93009 ...

अब होंगे सपने साकार भाग - 27

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  अब होंगे सपने साकार भाग -27 जब किस्मत साथ न दे तो... जिन्दगी के तजुर्बे ने एक बात सिखाई है कि सबसे गहरी चोट किसी अपने ने ही पहुँचाई है। मेरे अपनों ने ही सिखाया है कि कोई अपना नहीं होता। मैंने अच्छा बनकर भी देखा है, लोग तब भी बुरा ही कहते हैं। कुछ चीजें अकड़ की वजह से नहीं, बल्कि आत्म सम्मान के लिए छोड़नी पड़ती है। आप रिश्ते बनाकर भी क्या कर लोगे, जब सामने वाले का इरादा ही न हो निभाने का? अगर वो आपके बिना खुश है, तो उसको खुश ही रहने दो। जब किस्मत साथ न दे, तो समझ लेना सिर्फ आपकी मेहनत ही आपका साथ देगी। तुम जितना ज्यादा ईमानदार सच्चे और सरल हो जाओगे, उतने ज्यादा ठगे जाओगे, उतने ज्यादा धोखे खाओगे। जिसका वक्त खराब है उनका साथ जरूर दो, जिसकी नियत खराब है उससे दूर रहना ही बेहतर है। ज़िन्दगी छोटी नहीं होती लोग जीना ही देर से शुरू करते हैं। जब तक रास्ते समझ आते हैं तब तक लौटने का वक्त हो जाता है। सफलता पा लेना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन सफलता को सम्भाले रखना बहुत बड़ी बात है। ताश का जोकर अपनों की ठोकर अक्सर पूरी बाजी ही घुमा देती है। कोई भी यहाँ आपका स्थायी साथ देने वाला नहीं है। अगर ज़ि...

जन-जन के संत भाग - 53

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जन-जन के संत  भाग - 53        गुरुकृपा ने लौटा दिया एक बेटी का मान सुश्री ऋची जैन, शिक्षिका, रहली, जिला सागर। आप समस्त दिगम्बर संतों के प्रति पूर्ण श्रद्धा विश्वास के साथ सदैव संत सेवा और भक्ति में तत्पर रहती हैं। जनसंत विरंजन सागर जी के प्रति आपकी विशेष श्रद्धा है। गुरु के तौर पर सदा ही आपको पूज्य गुरुदेव का वृहद आशीष प्राप्त हुआ है। आप बताती हैं कि कुछ समय पूर्व शाला में अध्यापन के दौरान गांव के कुछ असामाजिक तत्वों ने आपकी स्वच्छ छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से भरपूर प्रयास किये। थोड़ी परेशानी होना स्वाभाविक है। अतः इसकी सूचना आपने तुरंत पूज्य गुरुदेव को भिजवाई। गुरुदेव ने पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए कहा - निडरता से और ईमानदारी से नौकरी करो। शेष प्रभु पार्श्वनाथ जी पर छोड़ दो। उनके आशीष के कुछ दिनों बाद ही उन तथाकथित लोगों को ऐसा दंड मिला कि उन्होंने ऋची जैन जी से आकर क्षमा याचना की और फिर कभी ऐसी हरकत न करने का वादा किया। इसी क्रम में शिक्षिका ऋची जैन जी बताती हैं कि एक बार उनकी बहुत तबियत बिगड़ गई। खड़े होने की भी हिम्मत नहीं थी। तब गुरुदेव को सूचना दी औ...

अब होंगे सपने साकार भाग - 26

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  अब होंगे सपने साकार भाग - 26   "ये पाँच बातें कभी किसी को मत बताएँ" सफलता का राज़- अगर आप लोगों को अपनी सफलता का राज़ बताएंगे तो वो भी ऐसा ही करेंगे। अपनी समस्याएँ किसी को न बताएँ। अपनी समस्याएँ लोगों के साथ साझा करने से हम हल्का महसूस करते हैं हमें बोझ कम लगता है लेकिन ऐसा करने से समस्याएँ घटने की बजाए बढ़ जाएँगी। अपने सपने किसी को न बताएँ, अगर आपने अपने लक्ष्य और अपने सपने तय कर लिए हैं तो बेहतर यही है कि आप उन्हें अपने आप तक रखें। उन्हें दूसरों से साझा करने से आपका दृष्टिकोण बदल सकता है। आप इसमें फँस कर रह जाएँगे। कभी किसी को मत बताएँ आप कितना कमाते हैं। अपने परिवार की दिक्कतों  को  किसी को कभी साझा ना करें। रचयिता - परम पूज्य जनसंत उपाध्याय श्री 108 विरंजन सागर जी महाराज क्रमशः ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्...

जन-जन के संत भाग - 52

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     जन-जन के संत  भाग - 52   निश्चेतन में चेतना भर दे... ऐसी है गु रु कृपा! दमोह निवासी सेठ प्रेमचन्द्र जी जैन, उम्र 70 वर्ष को अचानक ब्रेन हैमरेज हो गया। स्थानीय चिकित्सकों ने किसी बड़े शहर में मरीज को भर्ती करने को कहा, परिवारजन आनन-फानन में नागपुर के सबसे अच्छे अस्पताल में ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें जांच करते ही वेंटिलेटर पर रख दिया। तमाम प्रयासों के बावजूद भी जब निश्चेतन पड़ी हुई देह में चेतना नगण्य पाई, तो चिकित्सकों के विशेष दल ने हाथ खड़े करते हुए कहा - वेंटिलेटर हटाते ही प्राण शून्य हो जाएंगे। परिवार जन गुरुदेव के परम भक्त थे।  उन्होंने चिकित्सक दल को एक रात इंतजार करने को कहा और इधर पूज्य गुरुदेव को खबर दी। जैसे गुरुदेव ने उनका आयु बन्ध देख लिया हो और वहीं से आशीष दिया और कहा कि सुबह खुद पता लग जायेगा और चमत्कार हुआ। मरीज एम्बुलेंस से बेहोश नागपुर गया था और दो दिन बाद बस में बैठकर दमोह वापिस। नागपुर का चिकित्सक दल आश्चर्य में रहा कि पूरे चिकित्सीय जीवन में ऐसे चमत्कार देखे ही नहीं। यह गुरु कृपा का सबसे बड़ा रूप था, जिसने मरीज को नई जिंदगी प्...

अब होंगे सपने साकार भाग -24

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  अब होंगे सपने साकार भाग -24 भरोसा एक शीशे की तरह है भरोसा एक शीशे की तरह है, एक बार टूट जाए फिर दोबारा वैसा करना बहुत मुश्किल है। सब लोग कहते हैं ज़िंदगी में कभी अकेले खुश नहीं रह सकते पर मेरा अनुभव है ज़िंदगी में अकेलापन हमें, ज़िंदगी कैसे जीते हैं और ज़िंदगी जीने का सही मतलब सिखाता है। चाहे जितने गम हों जीवन में मुस्कुराना फिर भी पड़ता है, यह दुनिया है दिखावे की यहाँ दिखावा करना पड़ता है। गलती उस इंसान की नहीं जो तुम्हें छोड़कर चला गया गलती तो तुम्हारी है जो आज भी उसका इंतजार कर रहे हो। रिश्ते बरकरार रखने की सिर्फ एक ही शर्त है, किसी की कमियाँ नहीं अच्छाइयाँ देखें। उम्र भर कमाया पैसा खत्म हो सकता है, लेकिन जो दुआएँ सेवा करने से मिलेंगी वो कभी खत्म नहीं हो सकतीं। मुझे किसी से कोई शिकवा नहीं, गलती मेरी ही थी जो मैंने इतना भरोसा किया। लोग कहते हैं जो दर्द देता है वही दवा देता है पता नहीं इन फ़िज़ूल की बातों को कौन हवा देता है। अपना हिस्सा कभी माँग कर देखो, सारे रिश्ते बेनकाब हो जाएँगे और अपना हिस्सा कभी छोड़कर देखो सारे काँटे गुलाब हो जाएँगे। पढ़ने में सेकण्ड लगता है, सोचने में मि...

जन-जन के संत भाग - 51

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जन-जन के संत  भाग - 51 गु रु  ने बचाये मूक प्राणी के प्राण... भगवां जिला छतरपुर की बात है। आपका विहार चल रहा था। विहार के दौरान, रास्ते में एक गाय मूर्छित अवस्था में पड़ी थी। जानकारों के अनुसार गाय ने कोई जहरीला पदार्थ निगल लिया, जिससे गाय के बचने की न्यूनतम संभावना है। तभी मुनि श्री विहार करते हुए वहाँ से निकले और उन्होंने मूर्छित गाय को देखते ही मंत्रोच्चरण के साथ अपने कमंडल के जल को गाय के मुँह पर डाला और एकाएक गाय में चेतना आकर कुछ समय बाद वह खड़ी हो गई। पास खड़े लोगों ने गुरुदेव का जयकारा लगाते हुए, गुरुदेव से कहा यह क्या था तो गुरुदेव मुस्कुराते हुए बोले - इस संसार में जीने का अधिकार सभी को है। जिसका आयु कर्म शेष है उसे कोई नहीं मार सकता। पर गुरु की कृपा और उनके आशीष ने पुनः बतलाया कि संतों की तपस्या के पीछे कोई न कोई चीज ऐसी है जिसे हम चमत्कार कहते हैं। गौ पुनि चंगी हो गई, यह है कथ्य प्रमाण, सच्चे गुरु मिल जायें तो, लौट आयेंगे प्राण। लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद सागर (म.प्र.) मो. 91 93009 34766 क्रमशः ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध...

अब होंगे सपने साकार भाग - 23

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अब होंगे सपने साकार भाग -23 एकता दुनिया की महान ताकत है। एकता दुनिया की महान ताकत है। मुट्ठी भर लोग भी अगर एक हैं, तो पूरी दुनिया में छा जाएंगे। तिनकों की कोई औकात नहीं होती, पर वे ही आपस में जुड़कर रस्सी बन जाएँ तो हाथी को भी बाँधने में समर्थ हो जाते हैं। एक नहीं सौ शून्यों का भी कोई मोल नहीं होता है। जब तक उनके पहले एक का अंक नहीं लग जाता। याद रखिए, लकड़ी का गट्ठर जब तक एक है, तो पहलवान भी नहीं तोड़ पाएगा, पर गट्ठर को यदि खोल दिया जाए तो उसकी  हर लकड़ी को बच्चा भी तोड़ने में कामयाब हो जाएगा। समाज को संगठित रखने के लिए ईर्ष्या और अहंकार का त्याग कीजिए, टांग खिंचाई मत कीजिए, दुस्साहस और संकीर्णता का त्याग कीजिए। अपने समाज को चुनाव और नेतागिरी से दूर कीजिए। कोई भी व्यक्ति आकर्षक और प्रभावी व्यक्तित्व का मालिक सुंदर पहनावे से नहीं अपितु सुंदर जीवन शैली से होता है। अगर हमारे जीवन में अच्छे गुण हैं तो हम सदा दूसरों के लिए आकर्षण का केन्द्र रहेंगे? याद रखिए, गोरा रंग दो दिन अच्छा लगता है। ज्यादा धन दो माह अच्छा लगता है पर अच्छा व्यवहार और स्वभाव जीवन भर अच्छा लगता है। अहंकार भगाइए,...

जन-जन के संत भाग - 50

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  जन-जन के संत  भाग - 50   ठीक हुआ आँतों का संक्रमण... खरगापुर निवासी महेश जैन जी की दिसम्बर 2020 में तबियत खराब हुई। उनकी आँतों में गंभीर संक्रमण हो गया। ग्वालियर के एक बड़े अस्पताल में उनकी सर्जरी भी की गई। फिर भी आँतों में संक्रमण बना रहा। तब वे घबराकर गुरुदेव के पास गए और रोने लगे। गुरुदेव ने पूरा मामला संज्ञान में लेते हुए कहा - बिल्कुल घबराने की बात नहीं है। आप पूर्ण स्वस्थ्य होकर पहले की तरह जिंदगी जियेंगे।  गुरुदेव ने महेश जी को एक जाप बताकर आशीर्वाद दिया। और कुछ ही दिनों में चमत्कार हुआ। उनका संक्रमण बीमारी पूरी दूर हो गई और  वे  पहले की तरह स्वस्थ हो गए। गुरु के इस उपकार से वे और उनका परिवार बहुत खुश हो गया। वे कहते हैं - गुरु ने हमारी जिंदगी में खुशियां भर दी। हम सभी कृतज्ञ हैं। उनके परिवार का कहना है - यह प्रथम अवसर नहीं था, जब पूज्य गुरुदेव की कृपा परिवार को प्राप्त हुई है। इसके पूर्व भी पूज्य गुरुदेव की कृपा हमारे परिवार को प्राप्त होती रही है। यूँ अदृश्य तन से हुआ, आँतों वाला रोग, पहले जैसा भक्त का, हुआ शरीर निरोग। लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद ...

जन-जन के संत भाग - 49

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जन-जन के संत  भाग - 49   भक्त को वतन ले आई गुरुकृपा श्रीमती राजेश जैन, चाँदनी हार्डवेयर सागर म.प्र., के पूरे परिवार की पूज्य गुरुदेव जनसंत विरंजन सागर जी महाराज के प्रति विशेष भक्ति रही है। परिवार की मुखिया श्रीमती राजेश जैन जी लगभग 64 वर्ष की आयु में पूर्ण धर्म ध्यान का पालन करती हुई अपनी बेटी के पास अमेरिका गईं, किन्तु प्रकृति के आकस्मिक प्रकोप से कोरोना बीमारी ने दूरस्थ देशों की आवागमन सुविधाएं, हवाई यात्रा आदि तत्काल प्रभाव से बन्द कर दी। ऐसे में विदेश में अपने देश और परिवार की याद आना स्वाभाविक है। 6 महीने से ज्यादा हो गए परदेश में, गृहनगर सागर में स्थित नन्ही नातिन की याद आने लगी। शासकीय स्तर पर आवागमन की आपातकालीन व्यवस्थाओं के अंतर्गत एक सूची तैयार कर यात्रियों को स्वदेश लाने की जवाबदारी भारत सरकार ने ली। शुरू की तैयार सूचियों में नाम नहीं आने से जब गुरुभक्त श्रीमति राजेश जी का मन बेचैन हुआ, तो एक ही उम्मीद जगी और अपने तारणहार गुरुदेव विरंजन सागर जी तक खबर पहुंचाई। गुरुदेव ने भक्त की पीड़ा जानते हुए परिवार जनों से कहा - इस हफ्ते माँ सकुशल हिंदुस्तान आ जायेंगी। और यह चमत...