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जन-जन के संत भाग - 52

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     जन-जन के संत  भाग - 52   निश्चेतन में चेतना भर दे... ऐसी है गु रु कृपा! दमोह निवासी सेठ प्रेमचन्द्र जी जैन, उम्र 70 वर्ष को अचानक ब्रेन हैमरेज हो गया। स्थानीय चिकित्सकों ने किसी बड़े शहर में मरीज को भर्ती करने को कहा, परिवारजन आनन-फानन में नागपुर के सबसे अच्छे अस्पताल में ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें जांच करते ही वेंटिलेटर पर रख दिया। तमाम प्रयासों के बावजूद भी जब निश्चेतन पड़ी हुई देह में चेतना नगण्य पाई, तो चिकित्सकों के विशेष दल ने हाथ खड़े करते हुए कहा - वेंटिलेटर हटाते ही प्राण शून्य हो जाएंगे। परिवार जन गुरुदेव के परम भक्त थे।  उन्होंने चिकित्सक दल को एक रात इंतजार करने को कहा और इधर पूज्य गुरुदेव को खबर दी। जैसे गुरुदेव ने उनका आयु बन्ध देख लिया हो और वहीं से आशीष दिया और कहा कि सुबह खुद पता लग जायेगा और चमत्कार हुआ। मरीज एम्बुलेंस से बेहोश नागपुर गया था और दो दिन बाद बस में बैठकर दमोह वापिस। नागपुर का चिकित्सक दल आश्चर्य में रहा कि पूरे चिकित्सीय जीवन में ऐसे चमत्कार देखे ही नहीं। यह गुरु कृपा का सबसे बड़ा रूप था, जिसने मरीज को नई जिंदगी प्...

अब होंगे सपने साकार भाग -24

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  अब होंगे सपने साकार भाग -24 भरोसा एक शीशे की तरह है भरोसा एक शीशे की तरह है, एक बार टूट जाए फिर दोबारा वैसा करना बहुत मुश्किल है। सब लोग कहते हैं ज़िंदगी में कभी अकेले खुश नहीं रह सकते पर मेरा अनुभव है ज़िंदगी में अकेलापन हमें, ज़िंदगी कैसे जीते हैं और ज़िंदगी जीने का सही मतलब सिखाता है। चाहे जितने गम हों जीवन में मुस्कुराना फिर भी पड़ता है, यह दुनिया है दिखावे की यहाँ दिखावा करना पड़ता है। गलती उस इंसान की नहीं जो तुम्हें छोड़कर चला गया गलती तो तुम्हारी है जो आज भी उसका इंतजार कर रहे हो। रिश्ते बरकरार रखने की सिर्फ एक ही शर्त है, किसी की कमियाँ नहीं अच्छाइयाँ देखें। उम्र भर कमाया पैसा खत्म हो सकता है, लेकिन जो दुआएँ सेवा करने से मिलेंगी वो कभी खत्म नहीं हो सकतीं। मुझे किसी से कोई शिकवा नहीं, गलती मेरी ही थी जो मैंने इतना भरोसा किया। लोग कहते हैं जो दर्द देता है वही दवा देता है पता नहीं इन फ़िज़ूल की बातों को कौन हवा देता है। अपना हिस्सा कभी माँग कर देखो, सारे रिश्ते बेनकाब हो जाएँगे और अपना हिस्सा कभी छोड़कर देखो सारे काँटे गुलाब हो जाएँगे। पढ़ने में सेकण्ड लगता है, सोचने में मि...

जन-जन के संत भाग - 51

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जन-जन के संत  भाग - 51 गु रु  ने बचाये मूक प्राणी के प्राण... भगवां जिला छतरपुर की बात है। आपका विहार चल रहा था। विहार के दौरान, रास्ते में एक गाय मूर्छित अवस्था में पड़ी थी। जानकारों के अनुसार गाय ने कोई जहरीला पदार्थ निगल लिया, जिससे गाय के बचने की न्यूनतम संभावना है। तभी मुनि श्री विहार करते हुए वहाँ से निकले और उन्होंने मूर्छित गाय को देखते ही मंत्रोच्चरण के साथ अपने कमंडल के जल को गाय के मुँह पर डाला और एकाएक गाय में चेतना आकर कुछ समय बाद वह खड़ी हो गई। पास खड़े लोगों ने गुरुदेव का जयकारा लगाते हुए, गुरुदेव से कहा यह क्या था तो गुरुदेव मुस्कुराते हुए बोले - इस संसार में जीने का अधिकार सभी को है। जिसका आयु कर्म शेष है उसे कोई नहीं मार सकता। पर गुरु की कृपा और उनके आशीष ने पुनः बतलाया कि संतों की तपस्या के पीछे कोई न कोई चीज ऐसी है जिसे हम चमत्कार कहते हैं। गौ पुनि चंगी हो गई, यह है कथ्य प्रमाण, सच्चे गुरु मिल जायें तो, लौट आयेंगे प्राण। लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद सागर (म.प्र.) मो. 91 93009 34766 क्रमशः ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध...

अब होंगे सपने साकार भाग - 23

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अब होंगे सपने साकार भाग -23 एकता दुनिया की महान ताकत है। एकता दुनिया की महान ताकत है। मुट्ठी भर लोग भी अगर एक हैं, तो पूरी दुनिया में छा जाएंगे। तिनकों की कोई औकात नहीं होती, पर वे ही आपस में जुड़कर रस्सी बन जाएँ तो हाथी को भी बाँधने में समर्थ हो जाते हैं। एक नहीं सौ शून्यों का भी कोई मोल नहीं होता है। जब तक उनके पहले एक का अंक नहीं लग जाता। याद रखिए, लकड़ी का गट्ठर जब तक एक है, तो पहलवान भी नहीं तोड़ पाएगा, पर गट्ठर को यदि खोल दिया जाए तो उसकी  हर लकड़ी को बच्चा भी तोड़ने में कामयाब हो जाएगा। समाज को संगठित रखने के लिए ईर्ष्या और अहंकार का त्याग कीजिए, टांग खिंचाई मत कीजिए, दुस्साहस और संकीर्णता का त्याग कीजिए। अपने समाज को चुनाव और नेतागिरी से दूर कीजिए। कोई भी व्यक्ति आकर्षक और प्रभावी व्यक्तित्व का मालिक सुंदर पहनावे से नहीं अपितु सुंदर जीवन शैली से होता है। अगर हमारे जीवन में अच्छे गुण हैं तो हम सदा दूसरों के लिए आकर्षण का केन्द्र रहेंगे? याद रखिए, गोरा रंग दो दिन अच्छा लगता है। ज्यादा धन दो माह अच्छा लगता है पर अच्छा व्यवहार और स्वभाव जीवन भर अच्छा लगता है। अहंकार भगाइए,...

जन-जन के संत भाग - 50

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  जन-जन के संत  भाग - 50   ठीक हुआ आँतों का संक्रमण... खरगापुर निवासी महेश जैन जी की दिसम्बर 2020 में तबियत खराब हुई। उनकी आँतों में गंभीर संक्रमण हो गया। ग्वालियर के एक बड़े अस्पताल में उनकी सर्जरी भी की गई। फिर भी आँतों में संक्रमण बना रहा। तब वे घबराकर गुरुदेव के पास गए और रोने लगे। गुरुदेव ने पूरा मामला संज्ञान में लेते हुए कहा - बिल्कुल घबराने की बात नहीं है। आप पूर्ण स्वस्थ्य होकर पहले की तरह जिंदगी जियेंगे।  गुरुदेव ने महेश जी को एक जाप बताकर आशीर्वाद दिया। और कुछ ही दिनों में चमत्कार हुआ। उनका संक्रमण बीमारी पूरी दूर हो गई और  वे  पहले की तरह स्वस्थ हो गए। गुरु के इस उपकार से वे और उनका परिवार बहुत खुश हो गया। वे कहते हैं - गुरु ने हमारी जिंदगी में खुशियां भर दी। हम सभी कृतज्ञ हैं। उनके परिवार का कहना है - यह प्रथम अवसर नहीं था, जब पूज्य गुरुदेव की कृपा परिवार को प्राप्त हुई है। इसके पूर्व भी पूज्य गुरुदेव की कृपा हमारे परिवार को प्राप्त होती रही है। यूँ अदृश्य तन से हुआ, आँतों वाला रोग, पहले जैसा भक्त का, हुआ शरीर निरोग। लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद ...

जन-जन के संत भाग - 49

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जन-जन के संत  भाग - 49   भक्त को वतन ले आई गुरुकृपा श्रीमती राजेश जैन, चाँदनी हार्डवेयर सागर म.प्र., के पूरे परिवार की पूज्य गुरुदेव जनसंत विरंजन सागर जी महाराज के प्रति विशेष भक्ति रही है। परिवार की मुखिया श्रीमती राजेश जैन जी लगभग 64 वर्ष की आयु में पूर्ण धर्म ध्यान का पालन करती हुई अपनी बेटी के पास अमेरिका गईं, किन्तु प्रकृति के आकस्मिक प्रकोप से कोरोना बीमारी ने दूरस्थ देशों की आवागमन सुविधाएं, हवाई यात्रा आदि तत्काल प्रभाव से बन्द कर दी। ऐसे में विदेश में अपने देश और परिवार की याद आना स्वाभाविक है। 6 महीने से ज्यादा हो गए परदेश में, गृहनगर सागर में स्थित नन्ही नातिन की याद आने लगी। शासकीय स्तर पर आवागमन की आपातकालीन व्यवस्थाओं के अंतर्गत एक सूची तैयार कर यात्रियों को स्वदेश लाने की जवाबदारी भारत सरकार ने ली। शुरू की तैयार सूचियों में नाम नहीं आने से जब गुरुभक्त श्रीमति राजेश जी का मन बेचैन हुआ, तो एक ही उम्मीद जगी और अपने तारणहार गुरुदेव विरंजन सागर जी तक खबर पहुंचाई। गुरुदेव ने भक्त की पीड़ा जानते हुए परिवार जनों से कहा - इस हफ्ते माँ सकुशल हिंदुस्तान आ जायेंगी। और यह चमत...

अब होंगे सपने साकार भाग - 25

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  अब होंगे सपने साकार भाग -25 अच्छी सूरत से अच्छा  है अच्छा  स्वभाव  रख ना   आजकल लोगों से दूर रहना ही अच्छा है, क्योंकि ये दुनिया सच में दुनिया ही है। कभी-कभी लाइफ में ऐसी सिचुएशन भी आ जाती है जहाँ कोई बात करे तो भी ठीक और न बात करे तो भी ठीक। ये ज़माना वहाँ पहुँच गया है, जहाँ कपड़े महंगे और इंसान दो कौड़ी का हो गया है। याद रखना अगर दूसरों से उम्मीद रखोगे, तो हार जाओगे और खुद से उम्मीद रखोगे, तो जीत जाओगे। लोग तो नाम तक भूल जाते हैं जब उनका आपसे काम निकल जाता है। उन लोगों के सामने हमेशा खुश रहो जो आपको पसंद नहीं करते क्योंकि आपकी खुशी उन्हें चैन से जीने नहीं देगी। अच्छी सूरत से ज्यादा मायने अच्छा स्वभाव रखता है। सूरत तो उम्र के साथ बदल जाती है पर अच्छा स्वभाव ज़िन्दगी भर आपका साथ देगा। इतिहास टकराने वालों का लिखा जाता है, तलवे चाटने वालों का नहीं। ज़माना उस मोड़ पर आ गया है जिस इंसान की दिल से मदद की, सोचो वही इंसान पीछे से वार कर देता है। इंसान तब बुरा बनने के लिए मजबूर हो जाता है जब लोग उसकी अच्छाई का फायदा उठाने लगते हैं। आजकल रिश्तों को जोड़े रखने के लिए कभी ...

जन-जन के संत भाग - 48

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जन-जन के संत  भाग - 48   गुरु कृपा से हारा विज्ञान... इम्फाल मणीपुर में पूज्य विरंजनसागर जी जब क्षुल्लक अवस्था में थे. तब वहां 25 दिन तक धर्म देशना की। वहां की समाज ने बड़ी भक्ति भाव के साथ धर्म लाभ प्राप्त किया। वहां एक सन्मति कासलीवाल नाम के व्यक्ति थे, जिन्हें कैंसर रोग हो गया था और चिकित्सकों द्वारा बीमारी का संक्रमण देखकर ठीक होने पर संशय जताया जाने लगा, तो उनके द्वारा इसकी जानकारी पूज्य विरंजन सागर जी महाराज जी को दी गई। गुरुदेव के प्रति उनकी पूर्ण भक्ति थी। गुरुदेव ने उन्हें भरपूर आशीष दिया और एक जाप करने कहा। कुछ ही दिनों में असाध्य कैंसर भी गुरु के आशीष के आगे नतमस्तक हो गया। चिकित्सक जानकर भी आश्चर्य में आ गए कि यह कैसे हो सकता है। पर गुरुकृपा के आगे सब कुछ सम्भव है। घर के मुखिया का हुआ, रोगी सकल शरीर,   गुरु विरंजन वैद्य सम, हर लेते हर पीर। लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद सागर (म.प्र.) मो. 91 93009 34766 क्रमशः ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने ...

अब होंगे सपने साकार भाग - 22

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  अब होंगे सपने साकार भाग -22  हर मंजिल के रास्ते होते हैं आज व्यक्ति भले ही ज़ीरो पर खड़े हों पर विश्वास रखो कि ज़ीरो ही बढ़ते-बढ़ते एक दिन हीरो बनता है। उम्मीदों का दामन कभी मत छोड़िए, मुश्किलों में तो जीवन का सबसे बड़ा सहारा उम्मीद ही है जो एक प्यारी सी मुस्कान देकर हमारे कानों में धीरे से कहती है। सब अच्छा होगा। सीखने की ललक हो तो मिट्टी के द्रोण से भी सीखा जा सकता है। महान गुरु की तलाश से पहले अपनी जिज्ञासा को महान बनाइए। सफलता के लिए इच्छा शक्ति चाहिए और इच्छा शक्ति के लिए उत्साह। उत्साह से किया गया हर कार्य सफलता का सुख देता है। योजना धैर्य से बनाइये और काम पूरी गति से कीजिए। आप तब तक मत रुकिए, जब तक लक्ष्य हासिल न हो जाए। याद रखिए कछुआ अपनी रफ्तार के कारण विजय प्राप्त नहीं करता, वरन् लक्ष्य के प्रति एक निष्ठा ही उसकी सफलता का राज है। हर मंजिल के रास्ते होते हैं और हर रास्ते पर मुश्किलें। मन में अगर जंग हो, तो विश्वास रखिए, जीत आपकी है। कामयाबी के दरवाजे उन्हीं के लिए खुला करते हैं, जो उन्हें खोलने के लिए खटखटाया करते हैं। विपरीत वातावरण बन जाने पर भी स्वय...

जन-जन के संत भाग - 47

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जन-जन के संत  भाग - 47   गुरु कृपा से बनते हैं सारे बिगड़े काम राजधानी दिल्ली के निवासी हैं श्री महावीर प्रसाद जी। करोलबाग में उनकी चातुर्मास कलश लेने की तीव्र अभिलाषा थी। पर उनका एक व्यक्तिगत कार्य रुका हुआ था। वह उस कार्य के लिए 25 वर्ष से परेशान थे। उन्होंने गुरुदेव से कहा - मैं पिछले 25 वर्षों से इस कार्य के लिए परेशान हूँ, जिसके पूर्ण होने की बिल्कुल संभावना नहीं दिखाई दे रही है। ऐसे में मेरी मंगल कलश लेने की भावना स्थिर नहीं हो पा रही। तब गुरुदेव ने मुस्कुराते हुए कहा - तुम पहले कलश लो। फिर देखना, सब ठीक हो जाएगा और आशीष दिया। गुरुदेव के कहने पर उन्होंने 5 लाख की बोली लेकर कलश ले लिया। ठीक 15 दिवस उपरांत उनका जो कार्य 25 वर्ष से अटका हुआ था, वह स्वतः ही सम्पन्न हो गया और उन्हें 1 करोड़ रुपये का व्यवसायिक फायदा हुआ। महावीर प्रसाद जी की प्रसन्नता जैसे सातवें आसमान पर पहुंच गई हो। गुरु वचन और गुरु मुख ने निकले हुए शब्दों पर पूर्ण श्रद्धा से हर बिगड़ा कार्य भी बन जाता है। वाकई गुरुदेव की लीला अपरंपार है। हितकारी गुरुदेव हैं, करते नहीं निराश, कष्ट दूर होगा अगर, है गुरु पर विश्वा...

अब होंगे सपने साकार भाग - 21

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  अब होंगे सपने साकार भाग -21 वक्त आपको भी सिखाता है  न करो जुर्रत किसी के वक्त पे, हँसने की कभी, ये वक्त है जनाब चेहरे याद रखता है। पैसा कमाने के लिए इतना वक्त खर्च न करो कि पैसे खर्च करने के लिए ज़िंदगी में वक्त ही न मिले। आप मिनटों का ध्यान रखें, और घंटे खुद का ख्याल रखेंगे। जो व्यक्ति मेरे बुरे वक्त में मेरे साथ है, उसके लिए मेरे पास यही शब्द हैं, मेरा अच्छा वक्त सिर्फ तुम्हारे लिए होगा। आपकी घड़ी कितनी भी कीमती क्यों न हो, मगर वक्त तो ऊपर वाले के हिसाब से ही चलता है। वक्त आपको वो भी सिखाता है, जो आप सीखना नहीं चाहते हैं। बेशक मुश्किल वक्त बताकर नहीं आता, लेकिन बहुत कुछ सिखाकर, समझाकर चला जाता है। जिंदगी जब मुश्किल वक्त में नाच नचाती है तो ढोलक बजाने वाले अपने जान-पहचान वाले ही होते हैं। गीता में स्पष्ट शब्दों में लिखा है निराश न हो कमजोर तेरा वक्त है तू नहीं। अपनों को हमेशा अपना होने का एहसास दिलाओ, वरना वक्त आपके अपनों को, आपके बिना जीना सिखा देगा। वक्त सिखा देता है इंसान को फ़लसफ़ा। वक्त आपका है चाहो तो सोने में उड़ा दो, या फिर सोना बना लो। कहते हैं, वक्त सारे घाव भर दे...

जन-जन के संत भाग - 46

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जन-जन के संत  भाग - 46   गुरु उपकार से सूख गया फेफड़ों का पानी सागर मध्यप्रदेश निवासी डॉ. आनंद जैन, जिनका पूरा परिवार परम् मुनि भक्त है, कोरोना की दूसरी लहर में कोरोना से संक्रमित होकर अस्पताल में भर्ती हो गए। ईश्वर की असीम कृपा से कोरोना के वायरस को मात देकर वह सुरक्षित घर आ गए। किन्तु वायरस ने शरीर के अंदर कुछ ऐसा संक्रमण दिया कि उनके फेफड़ों में पानी (प्लूरल इफ्यूशिन) भरने लगा। मध्यप्रदेश के सभी विशेषज्ञ चिकित्सकों से उपचार लिया। पर फेफड़ों में पानी भरना बंद न हुआ। स्थानीय चिकित्सकों ने बीमारी की खतरनाक स्थिति का पूर्व अंदाज लगाकर किसी बड़े अस्पताल में जांच और उपचार की सलाह दी। तब परिवार जन, तुरंत उन्हें फेफड़ो के विश्व विख्यात यशोदा अस्पताल हैदराबाद ले गए,वहां विशेषज्ञ चिकित्सकों के दल ने उनकी पूरी जांच पड़ताल की और दस दिन भर्ती रखा। दो सर्जरी हुई पर बीमारी और फेफड़ों में पानी आने की वजह न तलाश पाए, तब हैदराबाद से परिवार जन ने पूज्य गुरुदेव को खबर पहुंचाई। गुरुदेव ने आशीष देकर वापिस गृहनगर सागर आने की बात कही और कहा - जब इतने बड़े अस्पताल में इतने बड़े चिकित्सकों के दल को बीमारी सम...

अब होंगे सपने साकार भाग - 20

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अब होंगे सपने साकार भाग -20 सब मतलबी हैं थोड़ा गुरूर भी ज़रूरी है जीने के लिए, ज्यादा झुक के मिलो तो दुनिया पीठ का पायदान बना देती है। गिरना भी अच्छा है औकात पता चलती है बुरे समय में साथ चलने वाले कितने हैं, ये बात पता चलती है। हौंसला मत हार गिरकर ऐ दोस्त, अगर यहाँ दर्द मिला है, तो दवा भी ज़रूर मिलेगी। किसी ने मुझसे पूछा कि पूरी ज़िन्दगी में क्या किया, मैंने हँसकर जवाब दिया कि किसी के साथ मैंने धोखा नहीं किया। जब भी तुम्हारा हौंसला आसमान तक जायेगा, याद रखना कोई न कोई तुम्हारे पंख काटने ज़रूर आयेगा। भले ही जीवन भर अकेले रह लेना लेकिन जबरदस्ती किसी से रिश्ता निभाने की जिद मत करना। पाँच चीजें अभी से छोड़ दो - 1. सबको खुश करना 2. दूसरों से ज्यादा उम्मीद करना 3. ज़िन्दगी में पास्ट में जीना 4. अपने आप को किसी और से कम समझना 5. बहुत ज्यादा सोचना। एक बात हमेशा याद रखो कि किसी के सामने गिड़गिड़ाने से न तो इज्जत मिलती है और न ही मोहब्बत। इसलिए अपने स्वाभिमान को जिंदा रखो, कोई अगर किस्मत में होगा तो वो खुद आकर आपको मिलेगा। शतरंज के शौकीन नहीं थे इसलिए धोखा खा गये, वो चाल पर चाल चलते रहे और हम रिश...

जन-जन के संत भाग - 45

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  जन-जन के संत  भाग - 45   गु रु  भक्ति से छूटी नशे की लत बड़ामलहरा जिला छतरपुर निवासी विनोद जैन जी उम्र 45 वर्ष, लंबे समय से मदिरा पान की आदत में लिप्त थे। उनकी नशे की इस आदत से उनका पूरा परिवार परेशान था। विनोद जैन चाहकर भी इस नशे की आदत से छुटकारा नहीं पा रहे थे। नशे ने उनकी देह को ऐसे जकड़ लिया था कि नशा न मिलने के कारण उनके हाथ पैर शून्य हो जाते थे। उनके परिवार ने कई चिकित्सकों और नशा मुक्ति केंद्र आदि जगह पर सम्पर्क किया पर यह आदत समय के साथ और बढ़ती चली गई। तभी गुरुदेव विरंजन सागर जी के पास उनका पूरा परिवार विनोद जैन जी को लेकर गया। गुरुदेव ने कहा - तुम चाहते हो कि यह आदत छूटे!  विनोद जी ने कहा - हाँ महाराज! पर मैं इस तरह जकड़ चुका हूँ कि नशा न मिलने से तड़पने लगता हूँ, क्या करूँ? समझ नहीं आता।  गुरुदेव बोले - यदि तुम वाकई चाहते हो, तो चिंता न करो। यह आदत छूट जाएगी और उन्होंने एक मन्त्र देकर आशीष दिया। विनोद जी का परिवार बताता है, कुछ ही दिनों में चमत्कार हुआ और जैसे नशा खुद गुरुदेव को नमोस्तु करके निकल गया हो। विनोद जैन नशे की आदत से पूर्ण मुक्त हुए और ध...