अब होंगे सपने साकार भाग -10
अब होंगे सपने साकार भाग -10 बुढ़ापा जीवन का अभिशाप नहीं... सुखी बुढ़ापे का एक मंत्र है। दादा बन जाओ, तो दादागिरी छोड़ दो और परदादा बन जाओ, तो दुनियादारी करना छोड़ दो। अगर आप जवान हैं, तो गुस्से को मंद रखो, नहीं तो कैरियर चौपट हो जाएगा और बूढ़े हैं, तो गुस्से को बंद रखो. नहीं तो बुढ़ापा बिगड़ जाएगा। बुढ़ापा जीवन का अभिशाप नहीं अनुभवों की कुंजी है। इसे विषाद नहीं. प्रभु का प्रसाद बनाइए। बचपन में ज्ञानार्जन कीजिए और जवानी में धनार्जन, पर बुढ़ापे को पुण्यार्जन के लिए समर्पित कर दीजिए। बचपन माँ को दिया, जवानी पत्नी को दी और बुढ़ापा पोते-पोतियों को दे देंगे, तो सोचिए अपनी सद्गति की व्यवस्था कब करेंगे। अगर घर में कोई वृद्ध हैं तो उन्हें भार मानने की बजाय भाग्य मानिए, याद रखें बूढ़ा पेड़ फल नहीं देता पर छाया तो ज़रूर देता है। अपने माता-पिता को भाग्य भरोसे मत छोड़िए उनके बुढ़ापे को सुखमय बनाने की कोशिश कीजिए। जब उन्होंने हमें प्रेम से पाला है, तो हम उन्हें विवशता में क्यों पाल रहे हैं। उनकी दुआएँ लीजिए और आने वाली पीढ़ी को संस्कार दीजिए। अनाथालय और अस्पताल में जाकर सेवा करना सरल है। पर घर ...