जन-जन के संत भाग - 63
जन-जन के संत भाग - 63 गुरु के आशीष से बनी न्यायाधीश ग्राम खड़ेरी एक छोटी सी जगह, जहाँ शिक्षा के पर्याप्त संसाधन तक उपलब्ध नहीं हैं। वहाँ की निवासी सुश्री ज्योति फुसकेले पिता टीकाराम जैन एक सामान्य परिवार से हैं। इस वर्ष सिविल जज परीक्षा में चयनित होकर उन्होंने जज बनने का स्वप्न पूर्ण किया। इस उपलब्धि पर उनके परिवार का ही नहीं बल्कि उनके पूरे गाँव और जैन समाज का नाम रोशन हुआ है। इस बड़ी उपलब्धि पर वे बताती हैं कि गुरुदेव विरंजन सागर जी उनके आराध्य हैं। उनकी कृपा और आशीष से यह उपलब्धि प्राप्त हुई है। उन्होंने पूरी-पूरी मेहनत की थी, और उस मेहनत को गुरुदेव का आशीष प्राप्त हुआ। आज वे जज बनकर राष्ट्र सेवा को तैयार हैं। लगन और श्रम को मिला, गु रु वर का आशीष, बिटिया जैन समाज की, बनी है न्यायाधीश। लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद सागर (म.प्र.) मो. 91 93009 34766 क्रमशः ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत ...