जन-जन के संत भाग - 6
जन-जन के संत भाग - 6 बचपन में हुआ था अपहरण बालक बल्लू गाँव में घर के नजदीक रेलवे स्टेशन के पास सूर्यास्त के समय अकेले घूम रहे थे। उम्र लगभग नौ या दस वर्ष की रही होगी। तभी वहां से एक ट्रक निकला। ट्रक में सवार अज्ञात लोगों की अकेले बालक को देखकर नीयत खराब हो गई। रहन सहन पहनावे से बालक किसी अमीर परिवार से लगा। बदमाशों ने फिरौती की तमन्ना से ट्रक को रोककर बल्लू से दमोह का रास्ता पूछने के बहाने बातों में बहलाया और दो लोगों ने मुँह पर हाथ रखकर जबरन बालक को उठाकर, ट्रक में बैठा कर ट्रक तेजी से आगे बढ़ा दिया। किन्तु इस बालक के अंदर एक दिव्य पुंज छिपा था। यह कोई सामान्य बालक नहीं भविष्य के जनसंत विरंजनसागर जी थे। बालक ने बिना घबराए मन ही मन णमोकार मन्त्र का जाप करते हुए, चुपचाप बैठने में भलाई देखी। करीब 200 किलो मीटर आगे ट्रक निकलने पर बालक ने नींद का नाटक किया। बदमाशों ने बालक को सोता हुआ जानकर किसी ढाबे पर भोजन के लिए ट्रक खड़ा किया। और वे सब ढाबे पर भोजन करने लगे। इतने में चतुर तेज बल्लू ने आंखे खोलकर इधर उधर देखकर ट्रक के दरवाजे की खिड़की से कूदकर दौड़ लगा दी और पूछते-पूछते बस स्टैं...