जन-जन के संत भाग - 18
जन-जन के संत भाग - 18 गुरुदेव की अनोखी है मुस्कान’ यह महत्त्वपूर्ण बात भी गुरुदेव के व्यक्तित्व के बखान में सामने आती है कि उनकी मंद मुस्कान में ढेरों रा ज़ छिपे होते हैं। वह हरदम मुस्कुराते रहते हैं। भक्तों से संवाद के समय विनोद भाव से बात करते हैं। प्रवचन और गुरु भक्ति के उपरांत श्रावकों को समझाते हुए खूब हँ सा ते हैं और सबसे कहते हैं - ' चे हरे पर मुस्कान रखो, और काम से काम रखो।' पूज्य गुरुदेव से जुड़े भक्त बताते हैं कि गुरुदेव की नसीहत है कि लोगों को कुछ न दे पाओ तो एक मुस्कान जरूर दे दिया करो। इसी तरह गुरुदेव के समक्ष जब कोई प्रश्न रखा जाए तो हर बात का उत्तर देना वे जरूरी नहीं समझते, कई बार सिर्फ मुस्कुरा देते हैं। भक्त मण्डल सोचता रह जाता है आखिर उनकी मुस्कान में क्या रा ज़ छिपा था। पर जो भी है गुरु की मुस्कान लूटने का जो म ज़ा है, वह प्रिय कवि मित्र अमित जैन मौलिक के इस छंद में समाहित है.. बेजुबां ज़मीं को लूटने में क्या रखा है भाई, बात तो मज़े की आसमान लूटने में है । लुत्फ ही कहाँ है इत्र की दुकान लूटने में, जो मज़ा सुगंध का बागान लूटने में है । हीरे...