जन-जन के संत भाग - 56
जन-जन के संत भाग - 56 और डॉक्टर साहब हो गये प्रसन्न... ऐसी है गुरु कृपा डॉ. अखिलेश जैन जी सागर मध्यप्रदेश के जाने माने पल्मोनोलॉजिस्ट हैं। जनसंत विरंजन सागर जी के प्रति आपके पूरे परिवार की गहरी आस्था है। आप बताते हैं कि वैसे तो सदा ही गुरुकृपा का प्रसाद पूरे परिवार को मिलता आया है। गुरु आशीष ने हमेशा ही मेरी रक्षा की है, और पीड़ित मानवता की सेवा में अग्रसर होने के लिए प्रेरणा दी है। किंतु एक विशेष घटना या चमत्कार को बताते हुए उन्होंने कहा कि सागर चातुर्मास में गुरुदेव की कलश स्थापना में श्रोताओं में बैठा था। तभी कलश स्थापित करने के लिए मंच से कलशों की जानकारी दी गई। मंच पर बैठे हुए गुरुदेव की मधुर मुस्कान ने जैसे कहा हो कि अखिलेश एक कलश तुम्हें लेना है। गुरु की अमृतम मुस्कान का आदेश मेरे लिए सर्वोपरि था। मैंने तुरंत दान का भाव बनाते हुए एक कलश की घोषणा कर दी। शाम को गुरुदेव ने कमरे में मुझसे कहा - डॉक्टर तुमने आज दान की प्रासंगिकता को सिद्ध किया है। श्री जी तुम्हें वह देंगे, जो तुमने कल्पना नहीं की होगी। आप बताते हैं, पूरे सात दिनों बाद एक संस्था से एक ब...