अब होंगे सपने साकार भाग -7

अब होंगे सपने साकार भाग -7

नशा जिंदगी का नाश करती है

दाँत से आँत तक और दिल से दिमाग तक नुकसान करता है हमारा नशा। यह शुरू तो सामूहिक होता है, पर इसका समापन एकाकी होता है।

यदि आपकी गुटखा खाने की आदत है, तो गुटखा में से 'ट' को हटाइए और एक बार उच्चारण कीजिए, फिर जी करे, तो प्रेम से खाइये।

 हम मंदिर में बीड़ी, सिगरेट और गुटखा इसलिए नहीं चढ़ाते क्योंकि वहाँ भगवान की मूर्ति है। फिर अपने भीतर बैठे जीते-जागते भगवान को दिन-प्रतिदिन ये सब क्यों चढ़ा रहे हैं।

 हम दुर्गन्ध नहीं, सुगन्ध बनें। अपने सांस्कृतिक पतन को रोकने का प्रयास करें, नीचे के कपड़े ऊपर आते जा रहे हैं और ऊपर के कपड़े नीचे होते जा रहे हैं।

नशा धीमा जहर है। ज़हर तो पीने वाले का ही नुकसान करता है पर नशा तो पूरे परिवार का नुकसान करता है यह तत्काल तो सुख देता है। पर इसकी बड़ी महँगी कीमत चुकानी पड़ती है।

जैसे एक गंदी मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है, वैसे ही एक बुरी आदत पूरे परिवार को तहस-नहस कर देती है सावधान, आपका एक शौक पूरे परिवार को शोक में डाल सकता है।

एक अच्छी आदत आदमी का भाग्य सुधारती है, वहीं बुरी आदत उसका भाग्य डुबो देती है। अपनी ज़िंदगी में अच्छी आदतों के बीज बोने का प्रयास कीजिए ताकि परिणाम में अच्छी फसलें आ सकें।

सिगरेट पीने से केवल सिगरेट ही छोटी नहीं होती, अपितु ज़िंदगी भी छोटी होती है। सावधान! हर सिगरेट आपको मौत के करीब लेकर जा रही है।

रचयिता - परम पूज्य जनसंत उपाध्याय श्री 108 विरंजन सागर जी महाराज

क्रमशः

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

द्वारा -सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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