अब होंगे सपने साकार भाग -6
अब होंगे सपने साकार भाग -6
भाग्य आपके हाथ में
भाग्य को हरा-भरा रखने के लिए, सदा सत्कर्म का पानी डालते रहिये। आखिर हरी घास तभी तक हरी रहेगी जब तक उसे पानी मिलता रहेगा।
जो भला करने वाले का बुरा करे वह शैतान है, जो भला करने वाले का भला करे वह इंसान है पर जो बुरा करने वाले का भी भला करे वही तो भगवान है।
दो में से एक काम ज़रूर कीजिये या तो सौ किताबें लिखकर जाइये ताकि उन्हें पढ़कर लोग आपको याद कर सकें या अपनी ज़िंदगी इस तरह जीकर जाइये कि आप पर सौ किताबें लिखी जा सकें।
पैर में मोच और दिमाग में छोटी सोच आदमी को कभी आगे नहीं बढ़ने देती। कदम हमेशा सँभलकर रखिए और सोच हमेशा ऊँची।
जीवन मिलना भाग्य की बात है, मृत्यु आना समय की बात है, पर मृत्यु के बाद भी लोगों के दिलों में जीवित रहना हमारे श्रेष्ठ कर्मों की बात है।
एक मिनिट में ज़िंदगी नहीं बदलती पर एक मिनिट में सोचकर लिया गया फैसला पूरी ज़िंदगी बदल देता है।
केवल किस्मत के भरोसे मत बैठे रहिये। जीवन में योग्यताओं को हासिल कीजिये, किस्मत से कागज उड़ तो सकता है, पर पतंग तो काबिलियत से ही उड़ेगी।
दो अक्षर का लक, ढाई अक्षर का भाग्य, तीन अक्षर का नसीब और साढ़े तीन अक्षर की किस्मत होती है, लेकिन ये चारों तभी परिणाम देते हैं, जब चार अक्षर की मेहनत इनके साथ जुड़ जाये।
भाग्य हाथ की रेखाओं में नहीं अपितु व्यक्ति के पुरुषार्थ में छिपा है। इस दुनिया में नसीब तो उनका भी होता है जिनके हाथ नहीं होते हैं।
हार-जीत हमारी सोच पर निर्भर है, मान लिया तो हार और ठान लिया तो जीत है।
रचयिता - परम पूज्य जनसंत उपाध्याय श्री 108 विरंजन सागर जी महाराज
क्रमशः
द्वारा -सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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