जन-जन के संत भाग - 35

 जन-जन के संत  भाग - 35

 

कठिन तप के साधक हैं गुरुदेव

सागर चातुर्मास की ही बात है। दिनांक 4 सितंबर 2022, धर्मराज पर्यूषण में गुरुदेव का लगातार चौथा उपवास चल रहा था। गुरुदेव अपनी साधना में छत पर बैठे हुए थे, अचानक जोरदार बारिश आ गई। पर बारिश की बूंदें गुरुदेव के त्याग के सामने कहाँ टिकने वाली थी। गिरती झमाझम बारिश में गुरुदेव आसन लगाए अपनी तप मुद्रा में बैठे रहे। लोगों ने कहा - ये मेघ भी गुरु के चरण पखारकर चले गए। 

जय हो गुरुदेव आपकी तपस्या!!

मेरी ही चार पंक्तियों में...

ऋतुएं मौसम हवा घटा जल, भक्त हैं सारे गुरुवर के,

नदियों के तट अंबर के पट, नम्र सितारे गुरुवर के।

गुरुवर बैठे मन्दिर जी में, अपने तप और संयम को,

मेघों ने खुद झूम झूम कर, चरण पखारे गुरुवर के।


लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद

सागर (म.प्र.)

मो. 91 93009 34766

क्रमशः

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

द्वारा -सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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धन्यवाद


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