अब होंगे सपने साकार भाग - 3

अब होंगे सपने साकार भाग - 3

हमेशा गुलाब के फ़ूल की तरह महकिए



  • मानवता की सेवा करने वाले हाथ उतने ही धन्य होते हैं, जितने परमात्मा की प्रार्थना करने वाले होंठ।
  • यदि आप चाहते हैं कि सभी लोग आपको प्यार व सम्मान दें तो आप अपने क्रूर और क्रोधित स्वभाव को सरल और सौम्य बनाएँ। आग से जलते वृक्ष की शाखा पर कोई भी पंछी बैठना पसंद नहीं करता।
  • हमेशा गुलाब के फूल की तरह रहिए जो तब भी खुशबू देता है, जब कोई उसे मसलता है।
  • धीरज मत खोओ, हीनता और हताशा तुम्हें शोभा नहीं देती अपने आत्म विश्वास को बढ़ाओ फिर से प्रयास करो। तुम्हें सफलता अवश्य मिलेगी।
  • मन की शांति को उतना ही मूल्य दीजिये, जितना कि आप अपनी पत्नी और पैसे को देते हैं।
  • मूर्ख और गलत व्यक्ति को दोस्त बनाने की बजाय आपका अकेला रहना ज्यादा फायदेमंद है।
  • गुलाब की तरह सदा इतने प्रसन्न रहिए कि चिंता के काँटे आपको छू भी न पाएँ।
  • कहते है जब कोई अपना दूर चला जाए तो तकलीफ होती है। पर उससे भी ज्यादा तकलीफ तब होती है जब कोई अपना पास रहकर भी दूरियाँ बना लेता है।
  • जब हर वर्ष दीवार पर टँगा पुराना कैलेण्डर उतार कर रख दिया जाता है तो वर्ष बीतने के बाद भी किसी के प्रति पलने वाले बैर विरोध को क्यों नहीं भुला देते।
  • माचिस की तीली के सिर होता है पर दिमाग नहीं इसलिए वह थोड़े से घर्षण से जल उठती है। हमारे पास सिर भी है, और दिमाग भी, फिर हम छोटी सी बात पर उत्तेजित क्यों हो जाते हैं?
  • पल भर का क्रोध आपका पूरा भविष्य बिगाड़ सकता है।
  • किन्हीं शत्रुओं से बचना चाहते हैं तो बचिये चिंता और क्रोध से। चिंता से दिमाग कमजोर होता है और क्रोध से रिश्ता।
  • छोटा सा समाधान बड़ी लड़ाई समाप्त कर देता है पर छोटी सी गलतफहमी बड़ी लड़ाई पैदा कर देता है। मन में घर कर चुकी गलतफहमियों को निकालें और समाधान का हिस्सा बनें।
  • रचयिता - परम पूज्य जनसंत उपाध्याय श्री 108 विरंजन सागर जी महाराज

    क्रमशः

    ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

    द्वारा -सरिता जैन

    सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

    हिसार

    🙏🙏🙏

    विनम्र निवेदन

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