सयानो की सीख
सयानो की सीख (परम पूज्य उपाध्याय श्री विरंजनसागर महाराज की लेखनी से) जो न माने सयानो की सीख, लेय टुकनिया मांगे भीख। एक बार एक गुरु और शिष्य एक गाँव की ओर जा रहे थे कि मार्ग में उनके पुण्य से उन्हें एक ऐसा अद्भुत गाँव मिला जहाँ प्रत्येक वस्तु दो पैसे में मिलती थी। शिष्य दो-दो पैसे देकर गाँव से अनेक प्रकार की वस्तुएं ले आया। दोनों ने मिलकर स्वादिष्ट भोजन किया। भोजन के उपरांत गुरु दूसरे गाँव में चलने को तैयार हुए, तभी शिष्य ने कहा कि गुरु जी! आप इसी गाँव में रुकिए। यहां अच्छा-अच्छा भोजन मिलता है। अन्यत्र जाने की आवश्यकता नहीं है। व्यर्थ क्यों परेशान होते हो? शिष्य लोभी था। रसना इंद्रिय का दास था। उसने अनेक प्रकार से गुरु को रोकने का प्रयास किया परंतु गुरु रुके नहीं और जंगल की ओर चले गए तथा शिष्य वहीं रह गया। एक दिन गाँव की देवी अचानक नाराज हो गई। ग्राम पुरोहित ने बताया कि देवी को खुश करने के लिए राज्य के सबसे मोटे व्यक्ति की बलि चढ़ाने का निर्णय किया गया है। शिष्य भी इन दिनों काफी मोटा हो गया था। आखिर पड़ा-पड़ा खाने वाला मोटा नहीं होगा तो और क्या होगा? राजा के आदमी मोटे आदमी की तलाश में निकल...