जन-जन के संत भाग - 62
जन-जन के संत भाग - 62
दर्द हो गया, आशीष से दूर...
सागर निवासी श्रीमती सीमा पति आलोक कण्ड्या उम्र 58 वर्ष, बताती हैं कि वे परम मुनि भक्त अरुण जैन जी द्वारा गुरु महिमा बताने पर मुनि श्री के दर्शन को सपरिवार आईं थीं। गुरुदेव की सहजता सरलता देखकर मुनि श्री के प्रति उनकी भक्ति और भी ज्यादा बढ़ गई।
सीमा जी को लंबे समय से कंधे और गर्दन के पीछे भयानक पीड़ा थी। चिकित्सकों को दिखाने के बाद भी आराम नहीं मिलता था। उन्होंने अपनी पीड़ा गुरुदेव को बताई, तो पूज्य गुरुदेव ने उन्हें आशीष दिया। वे कहती हैं - उनके आशीष के बाद उनका दर्द जैसे हवा में उड़ गया हो। उन्हें कष्ट से मुक्ति मिली। वे इसे पूर्णतया गुरुकृपा का चमत्कार मानती हैं।
मुश्किल में मुनिराज की, जिसने लगाई टेर,
आधि व्याधि पल में टली, किंचित लगी न देर।
लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद
सागर (म.प्र.)
मो. 91 93009 34766
क्रमशः
द्वारा -सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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