अब होंगे सपने साकार भाग - 21

 अब होंगे सपने साकार भाग -21


वक्त आपको भी सिखाता है 

  • न करो जुर्रत किसी के वक्त पे, हँसने की कभी, ये वक्त है जनाब चेहरे याद रखता है।

  • पैसा कमाने के लिए इतना वक्त खर्च न करो कि पैसे खर्च करने के लिए ज़िंदगी में वक्त ही न मिले।

  • आप मिनटों का ध्यान रखें, और घंटे खुद का ख्याल रखेंगे।

  • जो व्यक्ति मेरे बुरे वक्त में मेरे साथ है, उसके लिए मेरे पास यही शब्द हैं, मेरा अच्छा वक्त सिर्फ तुम्हारे लिए होगा।

  • आपकी घड़ी कितनी भी कीमती क्यों न हो, मगर वक्त तो ऊपर वाले के हिसाब से ही चलता है।

  • वक्त आपको वो भी सिखाता है, जो आप सीखना नहीं चाहते हैं।

  • बेशक मुश्किल वक्त बताकर नहीं आता, लेकिन बहुत कुछ सिखाकर, समझाकर चला जाता है।

  • जिंदगी जब मुश्किल वक्त में नाच नचाती है तो ढोलक बजाने वाले अपने जान-पहचान वाले ही होते हैं।

  • गीता में स्पष्ट शब्दों में लिखा है निराश न हो कमजोर तेरा वक्त है तू नहीं।

  • अपनों को हमेशा अपना होने का एहसास दिलाओ, वरना वक्त आपके अपनों को, आपके बिना जीना सिखा देगा।

  • वक्त सिखा देता है इंसान को फ़लसफ़ा।

  • वक्त आपका है चाहो तो सोने में उड़ा दो, या फिर सोना बना लो।

  • कहते हैं, वक्त सारे घाव भर देता है, पर सच तो यही है कि हम दर्द के साथ जीना सीख जाते हैं।

  • समाधान के लिए प्रयत्न कीजिए वरना आप स्वयं ही समस्या बन जाएँगे, प्रयास सकारात्मक हो तो हर समस्या का समाधान निकल आता है।

  • बड़े काम की तलाश करते रहने की बजाय छोटा काम ही सही शुरू कर दीजिए। आखिर हर बड़े का जन्म छोटी कोख से ही होता है।

  • उस समय विशेष शांत रहिए जब कोई अपना गुस्सा आप पर निकालने लगे, धैर्य और शांति ही गुस्से का मुकाबला करने का शस्त्र है।

  • सलाह वही दीजिए जो हितकारी हो, अपना स्वार्थ साथ में रखकर किसी को सलाह देने का अपराध मत कीजिए।

  • एक समय में एक ही काम कीजिए ताकि वह पूरी एकाग्रता से सम्पन्न हो सके, सफलता का सार "एक काम एक मन।"

  • कुछ लोग जीने के लिए खाते हैं, कुछ खाने के लिए जीते हैं। वह भोगी है जो खाने के लिए जीता है पर जो जीने के लिए संयमित खाता है वह योगी है।

  • स्वाद के लिए खाना अज्ञान है, जीने के लिए खाना बुद्धिमानी है, पर संयम की रक्षा के लिए खाना साधना है।

  • जिसके खान-पान का पता नहीं समझो उसके खानदान का पता नहीं, अपने खाने को पवित्र रखिए ताकि आपके खानदान का गौरव बना रहे।

रचयिता - परम पूज्य जनसंत उपाध्याय श्री 108 विरंजन सागर जी महाराज

क्रमशः

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

द्वारा -सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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