अब होंगे सपने साकार भाग - 2

अब होंगे सपने साकार भाग - 2

 रंगोली दो दिन की होती है


रंगोली दो दिन की होती है, फिर भी उसे हम खूब सजाते हैं। ठीक वैसे ही ज़िंदगी भी कुछ वर्षों की है, इसे श्रेष्ठ कर्मों से खूब सजाने की कोशिश कीजिए।

केवल धागा लम्बा होने से कोई पतंग आसमान तक नहीं पहुँचती, पतंग को आसमान तक पहुँचाने के लिए उड़ाने का तरीका आना ज़रूरी है।

ज्यादा धन होने से ज़िंदगी में खुशियाँ नहीं आती, ज़िंदगी में खुशियाँ भरने के लिए प्रेम और मिठास का रंग तरीके से घोलना जरूरी है।

चेहरा देना कुदरत का काम है और चेहरे को रंग देना भी कुदरत का ही काम है, पर जीवन को देखने और जीने का ढंग कैसा हो, यह अपने आप पर है। जीवन ऐसा जिएँ जो औरों को भी इंद्र धनुषी रंग जैसा सुकून दे।

रचयिता - परम पूज्य जनसंत उपाध्याय श्री 108 विरंजन सागर जी महाराज

क्रमशः

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

द्वारा -सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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