अब होंगे सपने साकार भाग -16
अब होंगे सपने साकार भाग -16
किस्मत से जैसा चाहा वैसा...
पग-पग सुनहरे फूल खिलें, कभी न हो कांटों का सामना जिंदगी आपकी खुशियों से भरी रहे यही है हमारी मनोकामना। उगते सूर्य की भांति सदा आपका तेज निरंतर बढ़ता रहे और आपका लक्ष्य हो सदैव, सदा निर्धन का हाथ थामना।
पहचान से मिला काम बहुत कम समय के लिये टिकता है, लेकिन काम से मिली पहचान उम्र भर कायम रहती है।
उगते सूर्य को हर कोई नमस्कार करता है।
जीवन के साथ हमें नहीं चलना बल्कि हमें हमारे साथ जीत को चलाना है।
किसी के अंदर ज्यादा डूबोगे तो टूटना पड़ेगा, यकीन न हो तो बिस्किट से पूछ लो।
इंसान युद्ध में एक बार मारा जाता है लेकिन राजनीति में कई बार।
किस्मत ने जैसा चाहा वैसे ढल गये हम, बहुत संभल के चले, फिर भी फिसल गये हम, किसी ने विश्वास तोड़ा तो किसी ने दिल, और लोगों को लगा कि बदल गये हम।
मेरे गुरु कहते हैं, मत सोचो कि तेरा सपना क्यों पूरा नहीं होता। हिम्मत वालों का इरादा कभी अधूरा नहीं होता, जिस इंसान के कर्म अच्छे होते हैं, उस के जीवन में कभी अँधेरा नहीं होता।
दर्द न होता तो खुशी की कीमत न होती, अगर चाहने से मिल जाता सब कुछ दुनिया में, तो ऊपर वाले की जरूरत न होती।
रिश्ते वो बड़े नहीं होते जो जन्म से जुड़े होते हैं, रिश्ते वो बड़े होते हैं जो दिल से जुड़े होते हैं।
रेगिस्तान भी हरे हो जाते हैं, जब अपने साथ अपने खड़े हो जाते हैं।
बूँद-बूँद से ही बिजली पैदा करने वाला बाँध बन जाता है
जो चलेगा वही मंजिल तक पहुँचेगा।
• हमारा व्यवहार हमारे व्यक्तित्व, स्वभाव, चरित्र और कल का परिचायक है। इन्हें बेहतर बनाने के लिये हम अपने व्यवहार को बेहतर बनायें।याद रखिए, घड़ी चलती है तो कमरे में होती है, नहीं तो कचरे में होती है।
रचयिता - परम पूज्य जनसंत उपाध्याय श्री 108 विरंजन सागर जी महाराज
क्रमशः
द्वारा -सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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