अब होंगे सपने साकार भाग -15
अब होंगे सपने साकार भाग -15
विनम्रता से विवेक का जन्म
जीवन में मौन और मुस्कान दोनों को महत्व दीजिए। मौन हमें कई मुसीबतों से बचाएगा, वहीं मुस्कान से कई समस्याओं का समाधान निकल आएगा।
विनम्रता से विवेक का जन्म होता है और विवेक से सत्य का। सत्य में प्रभु का निवास है और प्रभुता वही है जहाँ जीवन में विवेक और विनम्रता है।
विवेक को अपनी तीसरी आँख समझिए, इनका तब भी उपयोग कीजिए जब दोनों आँखें बंद हों।
दुनिया में मूर्ख और मृतक दो लोग ऐसे होते हैं जो अपनी मानसिकता नहीं बदल सकते। आप समझदार हैं, अपने पुराने ख्यालात और विरोध का त्याग कीजिए।
प्रलय आने पर समुद्र भी मर्यादा तोड़ देता है, पर सज्जन लोग महाविपत्ति आने पर भी मर्यादा नहीं छोड़ते हैं।
कुशल व्यवहार आपके जीवन का आईना है, इसका आप जितना अधिक इस्तेमाल करेंगे, आपकी चमक उतनी ही बढ़ जाएगी।
चुप भी रहिए और बोलिए भी। बोलना अगर चाँदी है तो मौन रहना सोना है, मछली अगर मुँह बंद रखना सीख जाए तो वह मुसीबत में फँसने से बच सकती है।
समय का मूल्य पहचानिए। सार्थक कामों में खर्च किया गया समय तिजोरी में सुरक्षित हो जाता है वही बातों और गप्पों में हाँका गया समय कूड़ेदान में चला जाता है।
रचयिता - परम पूज्य जनसंत उपाध्याय श्री 108 विरंजन सागर जी महाराज
क्रमशः
द्वारा -सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
विनम्र निवेदन
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