जन-जन के संत भाग - 48
जन-जन के संत भाग - 48
गुरु कृपा से हारा विज्ञान...
इम्फाल मणीपुर में पूज्य विरंजनसागर जी जब क्षुल्लक अवस्था में थे. तब वहां 25 दिन तक धर्म देशना की। वहां की समाज ने बड़ी भक्ति भाव के साथ धर्म लाभ प्राप्त किया। वहां एक सन्मति कासलीवाल नाम के व्यक्ति थे, जिन्हें कैंसर रोग हो गया था और चिकित्सकों द्वारा बीमारी का संक्रमण देखकर ठीक होने पर संशय जताया जाने लगा, तो उनके द्वारा इसकी जानकारी पूज्य विरंजन सागर जी महाराज जी को दी गई।
गुरुदेव के प्रति उनकी पूर्ण भक्ति थी। गुरुदेव ने उन्हें भरपूर आशीष दिया और एक जाप करने कहा। कुछ ही दिनों में असाध्य कैंसर भी गुरु के आशीष के आगे नतमस्तक हो गया। चिकित्सक जानकर भी आश्चर्य में आ गए कि यह कैसे हो सकता है। पर गुरुकृपा के आगे सब कुछ सम्भव है।
घर के मुखिया का हुआ, रोगी सकल शरीर,
गुरु विरंजन वैद्य सम, हर लेते हर पीर।
लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद
सागर (म.प्र.)
मो. 91 93009 34766
क्रमशः
द्वारा -सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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