जन-जन के संत भाग - 45
जन-जन के संत भाग - 45
गुरु भक्ति से छूटी नशे की लत
बड़ामलहरा जिला छतरपुर निवासी विनोद जैन जी उम्र 45 वर्ष, लंबे समय से मदिरा पान की आदत में लिप्त थे। उनकी नशे की इस आदत से उनका पूरा परिवार परेशान था। विनोद जैन चाहकर भी इस नशे की आदत से छुटकारा नहीं पा रहे थे। नशे ने उनकी देह को ऐसे जकड़ लिया था कि नशा न मिलने के कारण उनके हाथ पैर शून्य हो जाते थे। उनके परिवार ने कई चिकित्सकों और नशा मुक्ति केंद्र आदि जगह पर सम्पर्क किया पर यह आदत समय के साथ और बढ़ती चली गई।
तभी गुरुदेव विरंजन सागर जी के पास उनका पूरा परिवार विनोद जैन जी को लेकर गया। गुरुदेव ने कहा - तुम चाहते हो कि यह आदत छूटे!
विनोद जी ने कहा - हाँ महाराज! पर मैं इस तरह जकड़ चुका हूँ कि नशा न मिलने से तड़पने लगता हूँ, क्या करूँ? समझ नहीं आता।
गुरुदेव बोले - यदि तुम वाकई चाहते हो, तो चिंता न करो। यह आदत छूट जाएगी और उन्होंने एक मन्त्र देकर आशीष दिया।
विनोद जी का परिवार बताता है, कुछ ही दिनों में चमत्कार हुआ और जैसे नशा खुद गुरुदेव को नमोस्तु करके निकल गया हो। विनोद जैन नशे की आदत से पूर्ण मुक्त हुए और धर्म ध्यानपूर्वक परिवार के साथ हंसी खुशी जीवन व्यतीत करने लगे। यह है गुरुकृपा का असर।
अन्य नशे में स्थिति, होगी बड़ी विचित्र,
वैयावृत्ति का नशा, गुणकारी है मित्र।
लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद
सागर (म.प्र.)
मो. 91 93009 34766
क्रमशः
द्वारा -सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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