जन-जन के संत भाग - 44
जन-जन के संत भाग - 44
समाज प्रधान भी हो गए प्रसन्न
वर्ष 2009 की बात है। आपका चातुर्मास कड़कड़ाती हुई ठंड में शिमला, हिमाचल प्रदेश में हुआ था। जहां प्रथम बार किसी जैन संत द्वारा चातुर्मास किया जा रहा था। आपकी अगवानी तत्कालीन मुख्यमंत्री महोदय माननीय प्रेमचन्द्र धूमल जी ने भव्यता से की। आपने वहां के कारावास में उपदेश देकर कैदी बन्धुओं को धर्म उपदेश दिए। तभी वहां समाज के प्रधान के.के. जैन जी की बहू अत्यंत बीमार हो गई।
सम्पूर्ण जांच उपरांत डॉक्टर ने उनके ठीक होने का बहुत कम प्रतिशत बताया। तब के.के. जैन जी परेशान होकर पूज्य गुरुदेव के पास गए, पूज्य गुरुदेव ने उनकी बहू को आशीष देते हुए एक जाप करने कहा। वे पूर्ण श्रद्धा से आशीष लेकर वापिस चले गए और पूरे चार दिवस बाद उनकी बहू पूर्ण ठीक हो गई। यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। के.के. जैन जी का पूरा परिवार गुरु के इस उपकार के प्रति कृतज्ञ होकर उनकी जय जय कार करने लगा।
दु:खिया यह संसार है, दुःख का कोई न पार,
गुरु शरण जो आ गया, हुआ तुरत उपचार।
लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद
सागर (म.प्र.)
मो. 91 93009 34766
क्रमशः
द्वारा -सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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