जन-जन के संत भाग - 42
जन-जन के संत भाग - 42
छूमंतर हो गई गर्भाशय की गांठ
रामटौरिया निवासी श्रीमती संध्या जैन w/o निर्मल जैन उम्र 35 वर्ष, को तीव्र पीड़ा होने पर उनके पेट की सोनोग्राफी की गई तो पाया कि गर्भाशय में गांठ है। डॉक्टर द्वारा तत्काल सर्जरी के लिए कहा गया। चिकित्सक द्वारा गर्भाशय का ऑपरेशन सुनकर वह परेशान हो गई। किंतु जीवन की रक्षा के लिए उन्होंने चिकित्सक से ऑपरेशन की तारीख ले ली।
तभी उनके गुरु विरंजन सागर जी बड़ा मलहरा में विराजमान थे। वह अपने पूरे परिवार के साथ ऑपरेशन के पहले गुरु दर्शन के लिए गई और मुनि श्री को रोते हुए अपनी पूरी समस्या बताई।
मुनि श्री ने कहा कि घबराओ नहीं। अच्छे से घर जाओ और एक जाप देते हुए आशीष देकर कहा .- अब आपका ऑपरेशन नहीं होगा। आप ऐसे ही ठीक हो जाओगी। और जैसे कोई चमत्कार हुआ हो, उन्होंने जब फिर से जांच कराई तो चिकित्सकों को गर्भाशय बिल्कुल सामान्य मिला।
आश्चर्य की बात ये रही कि गुरुदेव के आशीष और वचन के बाद उनकी पीड़ा बिल्कुल दूर हो गई। गुरु कृपा के आगे दवा ने घुटने टेक दिए हों जैसे। गुरु के आशीष से ऑपरेशन नहीं कराना पड़ा और पीड़ा भी दूर हुई। संध्या जैन जी का पूरा परिवार गुरु चरणों का ऋणी हो गया। आज इनके पूरे परिवार की गुरु के प्रति भक्ति देखते ही बनती है।
कैसा कोई मर्ज हो, कैसा कोई दर्द
पीड़ित भक्तों के गुरु, हैं सच्चे हमदर्द।
लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद
सागर (म.प्र.)
मो. 91 93009 34766
क्रमशः
द्वारा -सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
विनम्र निवेदन
यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।
धन्यवाद
Comments
Post a Comment