जन-जन के संत भाग - 40
जन-जन के संत भाग - 40
मान गये भगवान
भगवान आदिनाथ मन्दिर जी में चले गए
मार्च 2022, बात बड़ा मलहरा जिला छतरपुर की है। भगवान आदिनाथ जी की 9 फीट की सफेद पाषाण की मनमोहक प्रतिमा मन्दिर जी के प्रवेश द्वार से अंदर जानी थी। मन्दिर के ऊपर के तल की जमीन से ऊंचाई प्रतिमा जी के अंदर प्रवेश में बाधा बन रही थी। दस से पंद्रह दिन क्रेन की सहायता से अलग अलग तरीकों से भगवान को मन्दिर के अंदर वेदी तक लाने की भरपूर कोशिश की गई।
समाज और क्रेन चालक जब परेशान हो गए, कोई युक्ति नहीं सूझी, तब वहीं विराजमान जनसंत मुनि विरंजन सागर जी से सहायता की गुहार लगाई। मुनि श्री ने रहस्यमयी मुस्कान के साथ कहा कि घबराओ नहीं, एक श्रीफल मूलनायक भगवान को समर्पित करो, उनसे निवेदन करो, फिर कोशिश करो।
उनके कहने पर समाज द्वारा भगवान के चरणों मे श्रीफल अर्पित कर पुनः कोशिश की गई और चमत्कार ही हुआ। बहुत आसानी से भगवान की प्रतिमा मन्दिर के दरवाजे से अंदर चली गई। यह दृश्य देखकर पूज्य मुनि विरंजन सागर जी के जयकारों की आवाज से प्रांगण गूंजने लगा। प्रत्यक्षदर्शी इसे गुरुवर का बड़ा चमत्कार मानते हैं।
व्यर्थ जतन जब हो गये, गुरु ने दिया निदान,
बात रखी मुनिराज की, पधराये भगवान।
लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद
सागर (म.प्र.)
मो. 91 93009 34766
क्रमशः
द्वारा -सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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