जन-जन के संत भाग - 38
जन-जन के संत भाग - 38
हांसी हरियाणा - धरती के अंदर से श्री जी किये प्रकट
कहते हैं - आज के समय में चमत्कार नहीं होते, पर जैन दर्शन और जैन संतों की कठिन साधना तपस्या से अतिशय आज भी देखने को मिलते हैं। वर्ष 2008 में आप मुनि विशोकसागर जी के संघ में थे और हांसी में 56 वर्ष बाद किसी मुनिराज का चातुर्मास हुआ था। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर, हांसी, हरियाणा में चातुर्मास कर रहे थे। युवा अवस्था में आपकी तीव्र साधना तपस्या के साथ-साथ सतत उपवास जारी थे।
तभी एक रात्रि आपको दिव्य शक्तियों द्वारा स्वप्न दिया गया कि मन्दिर के सामने खाली पड़ी जगह पर धरती के गर्भ में अतिशयकारी श्री जी की प्रतिमा है, और आप श्री जी को नियत समय में प्रकट करें। तब यह बात आपने वहां संघस्थ मुनि श्री और समस्त समाज को बताई।
दिव्य शक्तियों के दिये गए समय में आपने वहां खुदाई कराई और धरती के गर्भ से चिन्तामणि भगवान पार्श्वनाथ जी की सफेद पाषाण की अति मनोरम प्रतिमा जी प्रकट हुई। चमत्कार पर चमत्कार तो तब हुआ, जब इस प्रतिमा का देवताओं द्वारा दुग्ध से अभिषेक प्रारंभ हुआ। यह दृश्य जैन धर्म की महिमा के उद्घोष और जयजयकार के लिए पर्याप्त था। यह आपके संत जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में एक है।
मनहर मुद्रा में प्रभु, आये काटने पाप
प्रगट धरा से हो गये, बने माध्यम आप।
लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद
सागर (म.प्र.)
मो. 91 93009 34766
क्रमशः
द्वारा -सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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