जन-जन के संत भाग - 36
जन-जन के संत भाग - 36
पाटे पर चरण अंकित हुए
दिवस था 8 सितंबर 2022, बुन्देलखण्ड के हृदय स्थल सागर, मध्यप्रदेश चातुर्मास का। पर्यूषण पर्व के दिन चल रहे थे। गुरुदेव की हमेशा की तरह कठिन साधना चल रही थी। पर्यूषण में विगत दस वर्षों से उनके लगातार दस उपवास जारी थे, किन्तु इस वर्ष गुरुदेव का स्वास्थ्य थोड़ा प्रतिकूल रहा। श्रावकों द्वारा बार-बार गुरुदेव से आहार चर्या का निवेदन किया जा रहा था।
गुरुदेव अपनी साधना और त्याग के प्रति अडिग थे, पर श्रावकों के अनुरोध पर सिर्फ जल ग्रहण करने की स्वीकृति दे दी। हर्ष के वातावरण में पड़गाहन उपरांत श्रीमति सुषमा गौना के चैके में गए। जल ग्रहण के लिए गुरुदेव जिस चैकी (पटा) पर खड़े थे, उस चैकी पर सफेद दुग्ध की तरलता की भांति गुरु के चरण अंकित हो गए, जिसे श्रद्धालुओं ने दैवीय दुग्ध पाद प्रक्षालन माना।
ज्ञात हो कि कोई भी जैन सन्त चैके में प्रवेश करने के पूर्व कमंडल के जल से अच्छी तरह अपने पैरों को धोकर ही चैके में प्रवेश करते हैं। ऐसी स्थिति में यह बात भी श्रावकों के मन में नहीं थी कि गुरुदेव के चरण कोई चूने या सफेद पदार्थ पर पड़े होंगे, जिससे यह चरण के निशान अंकित हुए। श्रावकों द्वारा इसे अतिशय माना गया। इस विषय पर गुरुदेव से जब भक्तों द्वारा पूछा गया तो वह सिर्फ मुस्कुरा दिये।
मेरी ही चार पंक्तियों में...
कौन चला आया नगरी में, अतिशय के उपहार लिये,
त्याग तपस्या चर्या संयम, के सारे त्यौहार लिये,
मात्र पारणा को जब आये, गुरूवर भक्त के चैके में,
पाटे तक ने आतुर हो चरणों के चिह्न उतार लिये।
लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद
सागर (म.प्र.)
मो. 91 93009 34766
क्रमशः
द्वारा -सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
विनम्र निवेदन
यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।
धन्यवाद
Comments
Post a Comment