जन-जन के संत भाग - 28
जन-जन के संत भाग - 28
विदेशों में भी हैं आपके भक्त
संत, सूरज, सरिता और सड़क किसी व्यक्ति विशेष के नहीं होते। जिसने संत की वाणी को समझ लिया, सन्त उसके हैं। पूज्य गुरुदेव की सहजता, सरलता और वाणी की मिठास का प्रभाव है कि जो आपके पास एक बार आया, वह आपसे कभी चाहकर भी दूर नहीं जा पाता। आपका त्याग, तप, संयम और देशना लोगों को आकर्षित करती है। साथ ही आपकी सहजता, सरलता और संवाद की कला आपसे जुड़ने को आमंत्रण देती है।
क्षुल्लक अवस्था मे आपने हिंदुस्तान के कोने कोने में जाकर धर्म देशना फैलाई है। साथ ही जैन और अन्य जाति वर्ग के लोगों में तीर्थंकरों की मंगल वाणी का जयघोष किया है। आपकी इस लोकप्रियता के कारण आपके कई अनुयायी भक्त हिंदुस्तान की भूमि से बाहर रहकर भी आपके बताए गए मार्गों पर चलकर जीवन धन्य कर रहे हैं। समय-समय पर स्वदेश प्रवास पर प्रत्यक्ष दर्शन लाभ लेकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
कोरोना काल मे लॉक डाउन और सोशल डिस्टेंस के कड़े नियमो से जहां मन्दिर जी के पट तक बन्द हो गए थे, वहां आपने सोशल नेटवर्क के माध्यम से जूम और अन्य साधनों से देश-विदेश के भक्तों के साथ जुड़कर धर्म देशना को निरन्तर जारी रखा है। अपने भक्तों के प्रति सहानुभूति और उनके कल्याण की भावना आपको विशेष बनाती है।
एक बार जिससे गुरु, कर लें वार्तालाप,
और निकट आता भगत, ऐसी चुम्बक आप।
लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद
सागर (म.प्र.)
मो. 91 93009 34766
क्रमशः
द्वारा -सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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