जन-जन के संत भाग - 27

 जन-जन के संत  भाग - 27

 

राष्ट्रीय संत मुनि तरुण सागर जी के साथ प्रवचन

बात वर्ष 2010 की है। जब आप क्षुल्लक अवस्था में थे, आपकी साधना बुन्देलखण्ड के हृदय स्थल सागर में चल रही थी। उसी बीच मँगलगिरि तीर्थ, जो कि सागर में स्थित है, वहाँ अल्प समय के लिए क्रांतिकारी संत मुनि तरुण सागर जी का आगमन हुआ। कड़वे प्रवचनों के लिए प्रसिद्ध मुनि तरुण सागर जी की अलग से खुले मैदान में प्रवचन सभा लगवाई गई।

भारी भरकम भीड़ और दूर-दूर से आये श्रावकों के मध्य मुनि तरुण सागर जी की उपदेश सभा मंे उनके मंच से उनके ही साथ उनसे पूर्व आप के प्रवचन हुए। जिसकी सराहना सम्पूर्ण समाज द्वारा की गई। प्रवचन उपरांत मुनि तरुण सागर जी द्वारा भी आपकी सकारात्मक सोच और किये जा रहे कार्यों की खूब प्रशंसा की गई और कहा गया कि समाज और राष्ट्र कल्याण में यूँ ही अग्रसर रहिए। देश को ऐसे संतों की बहुत आवश्यकता है।

जग विख्यात मुनि श्री, तरुण सिन्धु जयवंत,

सुन वाणी जनसंत की, मुदित हुये श्री संत।

लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद

सागर (म.प्र.)

मो. 91 93009 34766

क्रमशः

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

द्वारा -सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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