जन-जन के संत भाग - 24

 जन-जन के संत  भाग - 24

 

महान तपस्वी - चर्या के गहन साधक

पूज्य गुरुदेव विरंजन सागर जी दीक्षा के प्रथम पड़ाव से ही कठिन साधना में लीन रहते हैं। गुढ़ा ललितपुर में चातुर्मास के दौरान दिसम्बर की कड़कड़ाती हुई ठंड में ब्रह्मकालीन मुहूर्त में मन्दिर जी की छत पर जाकर एकांत मुद्रा में साधना करते रहते थे। वहीं भीषण गर्मी में तपती दोपहर में आग उगलती लपटों के बीच आपको कई कई बार तेज धूप में साधना करते पाया जाता है। यह आपकी आत्मा के एक कठिन गहन योगी तपस्वी होने के पूर्ण संकेत देता है।

इसके साथ ही एक महत्त्वपूर्ण बात यह कि आपको अनुवांशिक रूप से मधुमेह शुगर की बीमारी है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार मधुमेह से ग्रसित व्यक्ति को इन्सुलिन की पूर्ति बनाये रखने के लिए बार-बार भोजन की आवश्यकता होती है।

अतः ऐसी स्थिति में व्रत या उपवास को पूर्ण रूप से निषेध किया जाता है, किंतु आप महान तपोबल के धारी हैं। पर्वराज पर्युषण में पिछले 9 वर्षों से 10 उपवास एवं प्रत्येक अष्टमी चतुर्दशी पर उपवास का नियम आपके तपोबल को बढ़ाता ह,ै जिसके आगे आपकी बीमारी भी शून्य दिखाई पड़ती है। 

जय हो गुरुदेव, धन्य है आपकी साधना!

तप की शक्ति है अतुल, इसमें क्या संदेह

गहन साधना देख कर, हार गई मधुमेह।

लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद

सागर (म.प्र.)

मो. 91 93009 34766

क्रमशः

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

द्वारा -सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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