जन-जन के संत भाग - 23

 जन-जन के संत  भाग - 23

 

जन्मभूमि ग्राम सदगुवां से श्री जी को भव्य नवीनतम जिनालय दमोह में विराजमान करवाया

सोच सार्थक हो, तो सफलता खुद आँगन में आकर आमंत्रण देती है। हुआ यूँ कि आपकी जन्मभूमि एक बेहद छोटा-सा गाँव सदगुवां है, जो कि जिला दमोह में स्थित है। जहाँ तीन जैन परिवार निवास किया करते थे। कुल मिलाकर तीन घर- एक आपके गृहस्थ जीवन का और दूसरा आपके गृहस्थ जीवन के चाचा सेठ कस्तूरचंद्र जी जैन का, जो आज भी गाँव मे निवास करते हैं।

आपकी दीक्षा के पूर्व ही आपका पूरा परिवार संस्कार धानी जबलपुर में स्थानांतरित हो गया था। ऐसे में गाँव के मंदिर की पूजा-अर्चना, अभिषेक और सुरक्षा एक परिवार पर ही आ गई। बरसात और प्रतिकूल मौसम में मन्दिर तक पहुंचने में गाँव की भूमि अवरोध पैदा करती थी। ऐसे में पूज्य गुरुदेव के मन मे एक सार्थक विचार आया, जो लोगों के लिए किसी स्वर्णिम स्वप्न की तरह था, कि क्यों न गाँव के श्री जी को निकट नगर दमोह में भव्य मंदिर का निर्माण कर विराजमान किया जाए?

इसी सकारात्मक सोच के साथ आपने वर्ष 2016 में दमोह में भव्य पंचकल्याणक कराया और सागर रोड पर लाल पत्थरों से भव्य जिनालय का निर्माण कराकर गाँव के श्री जी को नवीन जिनालय दमोह में विराजमान किया। दमोह की पूरी जैन समाज ने तन, मन, धन से सहयोग कर आपके आशीर्वाद और मंगल सान्निध्य में इस स्वर्णिम अवसर को संपन्नता दी।

ग्राम सद्गुवां में नहीं, बचा विनय आधार,

पहुँचा दिये दमोह में, जग के पालन हार।

लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद

सागर (म.प्र.)

मो. 91 93009 34766

क्रमशः

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

द्वारा -सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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