जन-जन के संत भाग - 17

 जन-जन के संत  भाग - 17

गुरुदेव की नरों का कमाल

पूज्य गुरुदेव से जुड़े भक्तों से यदि संवाद करें, तो एक बात जरूर निकल कर आती है कि गुरुदेव की नजरें कमाल की हैं। एक बार में वे कई-कई भक्तों को देख लेते हैं। प्रवचन सभा मे खचाखच भरी भीड़ में भी उनकी नजर अंतिम पंक्ति के श्रावकों तक रहती है। कोई एक बार भी उनसे मिलकर परिचय दे दे, तो सालों बाद भी उन्हें उस व्यक्ति का नाम याद रहता है। प्रवचन और धर्म सभाओं में वह अपने भक्तों का नाम लेकर चीजें समझाने का प्रयास करते हैं। कई-कई बार सदन में बैठे श्रावक सोचते हैं - एक समय बाद गुरुदेव की सभा में बैठा हूँ, गुरुदेव नहीं पहचाने होंगे। पर अचानक उनके श्री मुख से उस व्यक्ति का नाम सहित संबोधन भक्त के मन को अति प्रसन्नता दे देता है कि पूज्य गुरुदेव को स्मरण रहा और उनके मुख से मेरा नाम निकला।

कई बार प्रत्यक्षदर्शियों से ऐसे किस्से सुनने को मिलते रहते हैं कि कोई व्यक्ति हैरान -परेशान उनकी सभा में दूर बैठा हो, तो गुरुदेव उसके चेहरे की उदासी देखकर अपने किसी भक्त से उस व्यक्ति को अपने कक्ष में बुलवाकर उससे संवाद करते हैं। दरअसल व्यक्ति के मन में श्गुरुश् शब्द का अर्थ भी यही है कि वह अपनी पीड़ा समस्या और मन की बात गुरु के समक्ष रख सके। पूज्य गुरुदेव की निगाहों में सब रहता है। वह बोलें अथवा न बोलें, पर तत्कालीन परिस्थितियां और प्रत्येक गतिविधि पर उनकी बारीक नज़र होती है। तभी तो उनके भक्त कहते हैं - गुरु की निगाहों से भक्त की मनोदशा छिप ही नहीं सकती।

शास्त्र सत्य कहते हमें, गुरु पद जग विख्यात,

बिना कहे गुरु जान लें, भक्त के मन की बात।

लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद

सागर (म.प्र.)

मो. 91 93009 34766

क्रमशः

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

द्वारा -सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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