जन-जन के संत भाग - 15
जन-जन के संत भाग - 15
शब्द सृजन शिल्पी हैं गुरुदेव
उच्च शिक्षा और बड़ी डिग्रियां धारण करने के उपरांत ही प्रबुद्धता और ज्ञान हासिल हो, यह आवश्यक नहीं है। पूज्य गुरुदेव की गृहस्थ अवस्था में शिक्षा भले हायर सैकेण्डरी रही हो। पर धर्म मार्ग पर चलते हुए स्वाध्याय और शास्त्रों के पठन से लौकिक ज्ञानार्जन उच्च स्तरीय रहा है। आपकी विशिष्ट प्रवचन शैली, सम सामयिक विषयों पर गहरी पकड़, शाब्दिक दृष्टिकोण और विषय के पीछे का चिंतन आपके ज्ञान-विज्ञान को बतलाता है। आपने सदैव संतत्व को जीने की कोशिश की है। कठिन चर्या और साधना के साथ-साथ सृजन पथ पर हमेशा श्रेष्ठ दिया है।
आपके द्वारा आपकी निजि डायरियों में आपके सजाये शब्दों में एक श्रेष्ठ लेखक एक उत्कृष्ट सृजन शिल्पी की झलक दिखाई दी है। पूज्य गुरुदेव के द्वारा उनकी लिखी डायरियों और प्रवचन को सुनकर उनके भक्तमंडल द्वारा उनकी पांच कृतियों को लिपिबद्ध कराया गया है। जिनके नाम निम्नानुसार हैं।
1. विरंजनवाणी -- पूज्य गुरुदेव के प्रवचन अंशों से तैयार
2. आत्मोत्थान का मार्ग -- पूज्य गुरुदेव के विचारों की कथानात्मक कृति
3. सम्यक् चिंतन -- चिंतन के क्षण
4. बोलती कथाएं -- मनमोहक कथाओं से बोध कराती हुई कृति
5. पूजा से पूज्यता -- आगम पूजन द्रव्य और महत्त्व का विस्तार लिए हुए कृति
6. अब होंगे सपने साकार -- पूज्य गुरुदेव के विचारों की रोचक कृति
7. वंदना के स्वर -- साधना का सुगम पथ है संगीत
8. जन-जन के संत-- विरंजन सागर
छोड़ पहेली बोलिये, गुरुदेव की जय।
लेखक कवि डॉ. अखिल जैन आनंद
सागर (म.प्र.)
मो. 91 93009 34766
क्रमशः
द्वारा -सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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