जीवन में चार पत्र आते हैं

जीवन में चार पत्र आते हैं

(परम पूज्य उपाध्याय श्री विरंजनसागर महाराज की लेखनी से)

एक व्यक्ति जिसका नाम भोंदूमल था, वह अपने रास्ते से जा रहा था। अचानक देखता है कि उसके पीछे एक परछाई सी चल रही है। उसने जाना कि वह तो यमराज की परछाई थी। जब उसने यमराज को देखा तो वह डर गया, क्योंकि इस दुनिया में हर व्यक्ति मौत से तो डरता ही है।

यमराज ने कहा कि मैं तुम्हें लेने नहीं आया हूँ, मैं तो तुमसे दोस्ती करने आया हूँ। यूँ तो मौत एक इनकम टैक्स ऑफिसर की तरह कहीं भी छापा मार देती है, वह कभी बताकर नहीं आती। इसलिए जीवन में दोस्ती करनी है या मित्रता करनी है तो केवल भगवान से करो। हमेशा उसे अपना मित्र बनाओ जो जीवन भर साथ देने वाला है।

जब यमराज ने भोंदूमल से दोस्ती का प्रस्ताव किया तो उसने मान लिया और उससे दोस्ती कर ली। भोंदूमल ने कहा कि माना, तुम हमेशा बिना बताए आते हो लेकिन अब तुम्हें दोस्ती का वास्ता है। जब भी आओगे तो मुझे समाचार दे देना। कोई पत्र डाल देना या फोन कर देना। यमराज चला गया। भोंदूमल ने सोचा कि अब क्या धर्म-कर्म करना है, मंदिर जाने का भी क्या फायदा? वह संतों की संगति करना और पूजा पाठ करना, सब कुछ भूल गया, क्योंकि उसने तो यमराज से दोस्ती कर ली थी।

व्यक्ति भी कितना मूर्ख है कि यमराज की दोस्ती के चक्कर में भगवान को भी भूल गया। ध्यान रखना, जीवन में हमेशा दो बातें याद रखनी चाहिएं - अपनी मौत और भगवान का नाम। जीवन में आप हर तरह की तैयारी करते हो, पर मौत की तैयारी नहीं करते। संत हमेशा मौत की तैयारी कर के चलते हैं। मौत कभी किसी को छोड़ती नहीं है। हर किसी को एक न एक दिन उसके साथ जाना पड़ता है। मरने के बाद हमारे साथ हमारा धन, पैसा, पति, घर, परिवार कुछ भी साथ जाने वाला नहीं है। सब यहीं रखा रह जाएगा। जो हमने पुण्य-पाप किए हैं वही साथ जाएंगे।

एक दिन भोंदूमल के सामने यमराज अचानक आकर खड़ा हो गया और बोला कि चलो! मैं तुम्हें लेने आया हूँ। भोंदूमल ने कहा कि आपने तो कहा था, आप पत्र भेजेंगे, पर आपने एक भी पत्र नहीं भेजा।

यमराज ने कहा - एक नहीं, मैंने तो चार-चार पत्र भेजे थे। पहला पत्र सफेद बालों का होना क्योंकि बालों का सफेद होना भी मौत के नज़दीक आने का संकेत है। दूसरा पत्र दाँतों का टूटना, तीसरा पत्र आँखों की रोशनी कम होना। चौथा कानों से सुनना कम कर दिया, लेकिन आपने चारों पत्र बिना पढ़े ही फाड़ कर फेंक दिए। बाल काले करवा लिए, डॉक्टर के पास गए और नए दाँत लगवा लिए, आँखों में लैंस डलवा लिए, कान में मशीन लगवा ली।

ये चार-चार पत्र तुमको संकेत दे रहे थे कि आप मरने वाले हो लेकिन आप नहीं समझे। इसलिए आज आपको मेरे साथ चलना ही पड़ेगा। यदि आप अपने जीवन को परमात्मा की ओर मोड़ दें और पूजन पाठ करके पुण्य की क्रिया में लग जाएं तो मौत भी आपको दगा नहीं दे सकेगी। आप हर समय उस घड़ी के लिए स्वयं को तैयार रख सकोगे।

ओऽम् शांति सर्व शांति!!

विनम्र निवेदन

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धन्यवाद।

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सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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