पुद्गल का भ्रम

पुद्गल का भ्रम

(परम पूज्य उपाध्याय श्री विरंजनसागर महाराज की लेखनी से)

सामायिक चिंतन-वस्तु का स्वरूप क्या है? हर द्रव्य की अपनी अलग सत्ता है। हर द्रव्य अपने से शून्य है। हर द्रव्य स्वयं में स्तब्ध है। हर द्रव्य अपने में वक्तव्य है। हर द्रव्य स्वयं में स्थित है। हर द्रव्य परभाव से भिन्न दृष्टि रखता है। अतः पर के स्थान पर निज में आओ। निज ज्ञान, दर्शन, सम्यक्त्व पर लक्ष्यपात करो। परपदार्थों के समान शरीर भी पुद्गल है। इन पुद्गल के टुकड़ों के पीछे पुद्गल शरीर को मत भ्रमाओ। पुद्गल के टुकड़ों के पीछे भाई-भाई में युद्ध की स्थिति उत्पन्न मत करो। बेटा पुद्गल के पीछे जन्म देने वाली मां को भी अपशब्द कहने से पीछे नहीं रहता।

जब तक तेरा भाव मुनि बनने का नहीं हुआ, तब तक यह तो सीख ले कि संसार में जितनी वस्तुएं दिखाई दे रही हैं, वे सब पुद्गल हैं और हे चैतन्य आत्मा! उनसे तेरा कोई संबंध नहीं है। सबका अपना-अपना परिणमन है। केवल मेरा राग भाव ही है, जो उन्हें अपना मान रहा है। जो मेरा है, वही मेरा है, पर तो मेरा हो ही नहीं सकता।

हे आत्मन्! आज तक मेरी दृष्टि जब भी गई, बाहर की वस्तुओं पर ही गई। आँखें खोल कर देखते हैं तो पर पदार्थ ही नज़र आते हैं। आत्मा को देखने के लिए तो आँखें बंद करके बैठना पड़ता है, तभी निज को निहारा जा सकता है। जब हर वस्तु अपने-अपने स्वभाव में स्थित है, तो मैं निज में क्यों नहीं जा रहा? मैं विभाव में क्यों जा रहा हूँ? मैं अपने स्वभाव को क्यों भूल गया हूँ? यह मेरे विचारों में कैसा परिणमन चल रहा है। मैं पुद्गल पदार्थों में राग-द्वेष करके कर्म बंध कर रहा हूं और वे अपने स्वभाव में हैं, इसलिए सरलता से आत्मा के साथ बंध रहे हैं।

जैसे जल स्वभाव से शीतल होता है और अग्नि के संयोग से कुछ समय के लिए उष्णता को प्राप्त हो जाता है और पर संयोग हटते ही अपने स्वभाव में अर्थात् शीतलता में परिणत हो जाता है। इसी प्रकार हमारी आत्मा का स्वभाव क्षमा धर्म है। हे आत्मन्! अपने स्वभाव में आओ और निज धर्म का पालन करो।

ओऽम् शांति सर्व शांति!!

विनम्र निवेदन

यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।

धन्यवाद।

--

सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

Comments

Popular posts from this blog

स्वतंत्रता दिवस

जीवन में गति है पर दिशा नहीं

प्रभु को प्राप्त करना है