प्रार्थना, प्रेम और वात्सल्य - जिंदगी को बदलने के सूत्र
प्रार्थना, प्रेम और वात्सल्य - जिंदगी को बदलने के सूत्र
(परम पूज्य उपाध्याय श्री विरंजनसागर महाराज की लेखनी से)
प्रार्थना, प्रेम और वात्सल्य, ये तीनों गुण जिंदगी को बदलने के लिए काफी हैं। जीसस ने सूत्र दिया प्रेम, महात्मा बुद्ध ने सूत्र दिया प्रार्थना और महावीर स्वामी ने सूत्र दिया वात्सल्य। तीनों महापुरुषों के सूत्र अपना लें, तो मरने के बाद नहीं, जीते जी हम स्वर्ग का अनुभव कर लेंगे। जिंदगी तीन लोगों से ही अपना संबंध बनाती है।
घर में जो बड़े हैं, वहाँ बुद्ध कहते हैं कि प्रार्थना का संबंध रखो।
जो हमउम्र हैं, तो जीसस प्रेम की बात करते हैं।
जो अपने से छोटे हैं, वहां महावीर स्वामी की वात्सल्य की धारा बहती है।
कलयुग में इन तीनों सूत्रों से जिंदगी बदल सकती है।
परिवार को टूटने से बचाना
सर्वोपरि हमें परिवार में पक्षी की तरह प्रेम के स्थान पर मछली की तरह प्रेम करना चाहिए। पक्षी सुबह का पानी पीने के बाद उड़ जाता है, जबकि मछली पानी में ही रहती है और यदि उसे पानी से अलग कर दिया जाए, तो वह अपने प्राणों को गंवा देती है। जिंदगी ऐसी जीनी चाहिए, जहाँ जिंदगी को दांव पर लगाकर परिवार की टूटन को बचा सकें तो परिवार को बचाना कोई महंगा सौदा नहीं है।
प्रेम को स्थापित करो
जो माता-पिता हमें जीवन देते हैं, उनके अंतिम समय में उनके साथ रहने को बच्चे तैयार नहीं होते। घर में प्रेम न हो तो सात फेरे सात जन्मों की तो क्या बात है, एक जन्म में ही टूट जाया करते हैं और यदि प्रेम हो तो हर जन्म में हम अपना वादा निभा सकते हैं। प्रेम ही संबंधों को अटूट बनाकर रखता है। हर घर में प्रेम को स्थापित करो।
गांव शहर का भेद
लोग अक्सर मुझसे पूछते हैं कि आप शहरों में ही क्यों रहते हो? मैंने कहा कि मेरी जरूरत गांव से ज्यादा शहरों में है। गांव और शहर का भेद बताते हुए कहते हैं कि गांव में मकान दूर-दूर होते हैं लेकिन मन पास-पास हुआ करते हैं, जबकि शहरों में मकान पास-पास हुआ करते हैं लेकिन दिल दूर होते हैं। गांव में मकान कच्चे होते हैं लेकिन संबंध पक्के होते हैं। इसलिए मैं शहरों में मकान ही नहीं मन को भी पक्का करने के लिए जाता हूँ।
दुनिया एक प्रतिध्वनि है। आज हर घर में पति-पत्नी एक दूसरे से प्रेम मांगते हैं। पति को शिकायत है कि पत्नी पति को प्रेम नहीं देती और पत्नी को शिकायत है कि पति उसको प्रेम नहीं देता। दोनों को देखकर ऐसा लगता है जैसे एक भिखारी दूसरे भिखारी से प्रेम मांग रहा है। जिसके पास प्रेम है ही नहीं, वह प्रेम कहाँ से देगा। हकीकत में देखा जाए तो प्रेम मांगने से नहीं मिला करता, प्रेम तो लुटाने से मिलता है। यह दुनिया एक प्रतिध्वनि है जो तुम दोगे वही लौटकर तुम्हारे पास आएगा।
ओऽम् शांति सर्व शांति!!
विनम्र निवेदन
यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।
धन्यवाद।
--
सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
Comments
Post a Comment