दीपावली मनाने का उद्देश्य

दीपावली मनाने का उद्देश्य

(परम पूज्य उपाध्याय श्री विरंजनसागर महाराज की लेखनी से)

दीपावली के दिन हम दीप जलाते हैं। यह पर्व हमें यही बतलाता है कि अपने हृदय में सत्य का प्रकाश करें और ज्ञान रूपी दीपक जलाएं। दीपावली भारतीय संस्कृति का पर्व है। इसके पीछे अनेक महापुरुषों के जीवन एवं कार्यों व घटनाओं का अपूर्व इतिहास है। भगवान महावीर, भगवान राम आदि महापुरुषों का संबंध दीपावली पर्व से है। दीपावली के दिन जैनों के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी ने अपने कर्मों पर विजय प्राप्त करके आत्मा के वास्तविक शुद्ध आत्मस्वरूप को प्राप्त किया था।

महावीर भगवान ने मोह रूपी शत्रु को जीतने के ध्येय से उत्तम ध्यान को जयशील अस्त्र बनाया। उन्हें केवल ज्ञान हुआ और वह सर्वज्ञ हो गए। अहिंसा, सत्य, अचौर्य आदि महाव्रतों का उपदेश दिया और श्रावकों को सत्य का मार्ग दिखाया। अहिंसा का जयघोष किया और मात्र 30 वर्ष की अल्पायु में ही जैनेश्वरी दीक्षा लेकर साधना की और लोगों को धर्म श्रवण कराया। कार्तिक बदी अमावस्या के ब्रह्म मुहूर्त में स्वाति नक्षत्र में वे मोक्ष चले गए। इसकी खुशी में हम दीपावली पर्व मनाते हैं।

यह पर्व हमें सीख देता है कि हमें अपने अंदर से बुराइयों का त्याग करना चाहिए। जैसे हम घर में साफ-सफाई करके कचरे को बाहर निकाल कर फेंक देते हैं, वैसे ही हमारे अंदर के कषायों के कचरे को निकाल कर फेंक देना चाहिए और मन की स्वच्छता और अच्छाई की प्राप्ति करनी चाहिए।

ओऽम् शांति सर्व शांति!!

विनम्र निवेदन

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धन्यवाद।

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सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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