अहंकार एक नशा है

अहंकार एक नशा है

(परम पूज्य उपाध्याय श्री विरंजनसागर महाराज की लेखनी से)

अहंकार एक नशा है। अहंकार भक्तों और भगवान के बीच दीवार का काम करता है। अहंकार चर्म रोग की तरह है। जब खुजली आने पर खुजाया जाता है तो वह प्रारंभ में तो अच्छी लगती है परंतु बाद में बहुत कष्ट देती है। अहंकार भी ऐसे ही खुजली के रोग के समान है। यह प्रारंभ में तो अच्छा लगता है, पर बाद में चित्त को बहुत कष्ट देता है। अहंकार ऐसा ही कष्टदायक है, फिर भी अपने अतीत और औकात को मत भूलो।

मनुष्य की हैसियत एक मुट्ठी राख से अधिक नहीं है। मदिरा का पान करने से तो मनुष्य मद के नशे में धुत हो जाता है पर अहंकार रूपी मदिरा का पान करने से जो नशा होता है उससे मनुष्य धुत नहीं बल्कि धूर्त और मूर्ख हो जाता है। अहंकार रूपी मदिरा का पान करने से बचो।

ओऽम् शांति सर्व शांति!!

विनम्र निवेदन

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धन्यवाद।

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सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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