अफसोस लोग किनारे पर जाकर डूब जाते हैं

अफसोस लोग किनारे पर जाकर डूब जाते हैं

(परम पूज्य उपाध्याय श्री विरंजनसागर महाराज की लेखनी से)

अफसोस लोग किनारे पर जाकर डूब जाते हैं। जिन सहस्त्रनाम का अनुष्ठान बहुत प्रभावित स्तोत्र है। अधिकतर साधकों ने इसका जाप करके मां सरस्वती की आराधना करते हुए ज्ञान और विद्या की उपलब्धियां पाई हैं। कोई भी व्यक्ति शुद्ध भाव से लगातार 6 माह तक इसका पाठ करे, तो दरिद्रता का नाश होकर कंठ में सरस्वती विराजमान होती है। णमोकार महामंत्र का प्रभाव भी जीवन को सफलता और शांति के मार्ग पर ले जाने वाला होता है।

जब घायल मरणासन्न कुत्ते के जीव को णमोकार महामंत्र सुनाया गया, तो वह उसके प्रभाव से मर कर स्वर्ग में देव हुआ। नाग-नागिन को अधजली अवस्था में बालक पारस ने जब यह मंत्र सुनाया तो वह भी धरणेन्द्र-पद्मावती हुए। परंतु बात इन अनुष्ठानों की श्रद्धा और विश्वास के साथ करने की है। लोग बार-बार अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं। सच्चे धर्म की राह छोड़कर मिथ्यात्व की ओर बढ़ जाते हैं।

अफसोस इस बात का नहीं कि लोग मंझधार में जाकर डूब जाते हैं, बल्कि अफसोस इस बात का है कि लोग किनारे पर जाकर डूब जाते हैं। ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने जिंदगी में बहुत कम पूजा-पाठ किए हैं, बहुत कम भक्ति की है, फिर भी अंत में धर्म मार्ग को अपना कर अपना भव सुधार लिया और जिन्होंने जिंदगी-भर पूजा-पाठ की है, बहुत से धार्मिक कार्यक्रम किए, फिर भी उन्हें अस्पताल में जाकर मरना पड़ा। मन बिगड़ने में समय नहीं लगता, चाहे कितना भी धर्म का दिखावा कर लो परंतु यदि मन स्थिर व एकाग्र नहीं है, तो उस धर्म का कोई फल मिलने वाला नहीं है।

संसार के दो ध्रुव सत्य हैं। संसार कहता है कि जो तुम्हारा अच्छा मित्र है, वह कभी भी तुम्हारा दुश्मन बन सकता है। अतः मित्रता के प्रति अविश्वास का भाव रखो और सावधान रहो।

जैन दर्शन कहता है कि जो आज तुम्हारा दुश्मन है, वह भी कभी तुम्हारा अच्छा मित्र बन सकता है। अतः सबके प्रति समता का भाव रखो।

हमारी दुकानदारी अब बंद हो गई है। हम अपना सामान समेटने में लगे हुए हैं। फिर भी हम ढूंढ रहे हैं कि कोई ग्राहक आ जाए। शायद कोई रात्रि भोजन का त्याग करने वाला आ जाए, संयम और त्याग का संकल्प लेने वाला आ जाए। जिसको भी यह माल लेना है, तो दुकान उठने वाली है, तुरंत ले जाए।

जब अशुभ का उदय होता है तब जाकर यह धर्म की बात समझ में आती है, गुरु की बात याद आती है। जिंदगी में सुख कम हैं और दुःख ज्यादा हैं। उपाय कम हैं, समस्याएं ज्यादा हैं। जिंदगी की यात्रा लंबी है और उसे नापने के लिए पांव बहुत छोटे हैं। समय रहते संभल जाओ वरना अंत में पछताने के अलावा कुछ नहीं बचेगा।

ओऽम् शांति सर्व शांति!!

विनम्र निवेदन

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धन्यवाद।

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सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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