प्रयास करने वाले ही पास होते हैं

प्रयास करने वाले ही पास होते हैं

(परम पूज्य उपाध्याय श्री विरंजनसागर महाराज की लेखनी से)

एक विद्यार्थी स्कूल से जब कॉलेज में पढ़ने जाता है तो परीक्षा के समय पास होने के लिए इतना पढ़ने का प्रयास करता है कि दिन-रात एक कर देता है, तब कहीं जाकर वह पास होने का सर्टिफिकेट ले पाता है। यदि प्रयास करने पर भी वह पास नहीं हो पाता तो यह उसका दुर्भाग्य ही कहा जाएगा। लेकिन जितने विद्यार्थी ईमानदारी से पढ़ कर पास होते हैं, वे सभी अपने अथक प्रयास के कारण ही होते हैं।

यह तो लौकिक शिक्षा की बात है लेकिन जीवन की परीक्षा में पास होने के लिए प्रयास करना अत्यन्त कठिन है। 50-60 वर्ष या 80 वर्ष की उम्र को पा लेना ही जीवन में सफल होने का प्रयास करना नहीं कहलाता। वास्तविक जीवन तो वह है जिसमें अहिंसा का पालन हो, हिंसा का त्याग हो, जीव दया का पालन हो और अपरिग्रह का भाव सदा बना रहे। ऐसा जीवन ही जिंदगी में सफल होने का सार्थक प्रयास माना जाता है।

ऐसे महान लोग ही अपने जीवन की परीक्षा में उत्तीर्ण होकर अपने वास्तविक निवास अर्थात् मोक्ष को प्राप्त करते हैं। प्रयास से ही हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है। सच्चे मन से किया गया प्रयास हर कार्य में च्यवनप्राश का कार्य करता है। प्रयास कभी भी विफल नहीं जाता, फिर चाहे वह भलाई के कार्य में हो या बुराई के कार्य में। प्रयास का परिणाम चाहे आज मिले या कल मिले, पर मिलता अवश्य है। कार्य अच्छा या बुरा हो सकता है, पर उसका फल आज न भी मिले तो कल तो अवश्य मिलना ही है।

कई लोग आज अच्छे कार्य करते हुए भी दुःखी रहते हैं और कई लोग बुरे कार्य करके भी ऐश्वर्यवान बने हुए हैं। यह पूर्व कृत अच्छे-बुरे प्रयासों के फल का प्रकटीकरण दिखाई देता है। आत्मा को जानने के प्रयास के माध्यम से ही हम पवित्र एवं पावन हो जाते हैं। यह प्रयास हमारी प्यास की ही अभिव्यक्ति है।

प्रयास सफलता का उद्गम स्थान है इसलिए दिखाई नहीं देता, लेकिन प्रयास का प्रकटीकरण हमारे वचन और तन से अभिव्यक्त होता है। तभी हमारा प्रयास इन स्थूल आँखों से स्पष्ट दिखाई देने लगता है। प्रयास से ही प्यास का अनुमान लगाया जाता है। प्यास को रुचि या सम्यक्त्व भी कहा जा सकता है और प्रयास को व्यवहार या चारित्र कहा जाता है।

किसी कार्य के लिए उत्पन्न हुई उत्कट प्यास ही प्रयास को गतिमान बनाती है। प्यास की उत्पत्ति जीवन के लक्ष्य से होती है। मोक्ष-प्राप्ति का लक्ष्य हमारा अंतिम मुकाम है। प्यास परमात्मा की खोज की इच्छा पैदा करती है और जीवंतता के प्यासे को परमात्मा अपने पास बुला लेता है। उत्तम प्यास से सच्चाई के पास का सर्टिफिकेट मिलता है। सच्ची प्यास से सम्यक् दिशा में प्रयास किया जाता है।

प्रयास से ही हम जीवन के इम्तिहान में पास हो जाते हैं। पास होते ही हमारा स्वयं में वास होता है। फिर जीव का संसार में निवास नहीं होता। अतः हमको चैतन्यता की प्यास पैदा करने का प्रयास करना चाहिए। तभी जीवन को सफल बनाया जा सकता है।

ओऽम् शांति सर्व शांति!!

विनम्र निवेदन

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धन्यवाद।

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सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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