बिना त्याग के भगवान नहीं बना जा सकता
बिना त्याग के भगवान नहीं बना जा सकता
(परम पूज्य उपाध्याय श्री विरंजनसागर महाराज की लेखनी से)
एक मूर्तिकार पाषाण खंड में अपनी छेनी-हथौड़ी से चोट करता है और अनवरत उसकी यह टंकार, वह चोट पाषाण सहन करता रहता है, जिससे धीरे-धीरे वह पाषाण या शिला एक आकार में आने लगती है। उसने अपने बाहर के अशुद्ध तत्त्व का त्याग कर दिया और वह अपनी शुद्ध अवस्था में आ गई। वह शुद्ध अवस्था उस मूर्तिकार की साधना का अंतिम रूप होता है।
एक ज्ञानी, एक दार्शनिक, एक विचारशील व्यक्ति के दृष्टिकोण से उस पाषाण का कोई ऐसा स्थान नहीं है, जहां उसे कोई न कोई निश्चित आकार दिखाई न दे रहा हो। उसे तो चारों तरफ पाषाण में भगवान की मूर्ति ही दिखाई देती है तथा वह पाषाण भी भगवान बनने के लिए चारों तरफ से कष्टों को सहन करने के लिए तैयार है।
यदि पाषाण को मूर्ति में परिवर्तित होना है तो चोट तो सहन करनी ही पड़ेगी। अनेक बार उसे चोट देने के बाद भी वह मूर्ति के रूप में परिणत नहीं होता, क्योंकि उसे स्वयं पर दृढ़ विश्वास नहीं होता। इसलिए मूर्ति रूप में परिवर्तित होने के लिए पाषाण को न जाने अनेक कितने कष्टों को दृढ़ता से सहन करना पड़ता है। उस पाषाण की सहनशीलता का ही परिणाम है कि वह मूर्ति का आकार प्राप्त करके पूज्य बन जाता है। इसलिए यदि मानव को भगवान बनना है तो उसके लिए भी उसे कितना त्याग और तप करना पड़ेगा, कितना श्रम और कितनी मेहनत करनी पड़ेगी! क्योंकि सहनशीलता, त्याग, तपस्या और समर्पण ही जीवन को निखारकर कुन्दन के समान परम सौंदर्य प्रदान करते हैं। जैसे मूर्ति बनने के बाद चोट के निशान दिखाई नहीं देते, वैसे ही भगवान बनने के बाद साधक कष्टों, परेशानियों तथा वेदना को भूल जाता है।
ऐसा विचार करके ही हम सभी श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में सिद्ध भगवान की अर्चना कर रहे हैं। हम सभी को सिद्ध भगवान में सच्ची श्रद्धा और आस्था अपनानी चाहिए और जीवन में कष्टों को सहन करने से पीछे नहीं हटना चाहिए। आज तक कोई भी व्यक्ति बिना त्याग-तपस्या के भगवान नहीं बन सका। जितनी आत्मायें शुद्ध अवस्था को प्राप्त कर परमात्मा बनी हैं, उन सभी ने उस पाषाण की तरह सहनशीलता धारण करके त्याग की साधना की है। हम भी उनका अनुकरण करें, तभी हम सच्चे अर्थों में भगवान बन सकेंगे।
ओऽम् शांति सर्व शांति!!
विनम्र निवेदन
यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।
धन्यवाद।
--
सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
Comments
Post a Comment