चरित्रवान व्यक्ति
मुनि श्री विरंजन सागर जी महाराज
चरित्रवान व्यक्ति
इस संसार में चरित्रवान व्यक्ति ही महान बनता है।
महानुभावों! इस संसार में चरित्रवान व्यक्ति ही महान बनता है। दुष्चरित्र वाले स्त्री-पुरुष को सभी हेय दृष्टि से देखते हैं। समाज में उनका जीवन कलंकित माना जाता है। मुनि श्री कहते हैं कि सच्चे देव-शास्त्र-गुरु की भक्तिपूर्वक आराधना करके, माता-पिता की सेवा करके, छल-कपट रहित व्यापार करके, अपने से बड़ों का आदर करके और एक अहिंसा-व्रत का पालन करके इस जीवन को सफल बनाना ही सर्वोत्कृष्ट तपस्या है। यही आचरण धर्मानुकूल कहलाता है।
मुनिश्री आगे कहते हैं कि हमें जो भी मिला है उसी में संतोष रखो। यदि तुम्हारे पास संतोष रूपी धन है तो तुम सबसे अधिक धनवान हो, अन्यथा अथाह सम्पत्ति के मालिक हो कर भी सब व्यर्थ है।
सुखी होने के लिए संतोषी वृत्ति वाला होना परम आवश्यक है। चारों गतियों में से चाहे हम किसी भी गति में जन्म लें, हर गति में दुःख ही दुःख हैं। शायद हम सोचते होंगे कि देवगति में तो सुख मिलता होगा पर स्वर्ग में भी देवगण एक दूसरे को देख कर ईर्ष्या भाव के कारण दुःखी होते रहते हैं। अतः यदि तुम सुख का अनुभव करना चाहते हो तो अपने से अधिक दुःखी व्यक्ति के दुःखों को देखो, तभी तुम अपने को उससे सुखी मान सकोगे। अपने से समृद्ध को देखोगे तो तुम्हें अभाव ही अभाव दिखाई देगा। आशा-तृष्णा की ज्वाला बढ़ती ही चली जाएगी। अतः हमें सुखी होने के लिए अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण करना अति आवश्यक है। मुनिश्री मर्यादा पुरुषोत्तम राम का दृष्टांत देते हुए कहते हैं कि उन्होंने अपने पिता की आज्ञा से घर-परिवार, राजपाट आदि सब कुछ त्याग दिया और आज किसी बेटे को ऐसा निर्देश दिया जाए तो वह खुद जाने के स्थान पर माँ-बाप को ही जंगल में छोड़ आएगा। इसका प्रमुख कारण है - आज की पीढ़ी में सच्चे धार्मिक संस्कारों का नितांत अभाव।
मुनिश्री ने माता-पिता को गुरु की संज्ञा दी है लेकिन आज बच्चों में केवल धार्मिक संस्कारों का ही नहीं बल्कि सामाजिक संस्कारों का भी अभाव है जो उन्हें अपने माता-पिता से प्राप्त होने चाहिए। यही कारण है कि उनमें दुष्प्रवृत्तियाँ पनप रही हैं और सदाचार व शिष्टाचार का अभाव होता जा रहा है। मुनिश्री ने कहा है कि जो माता-पिता अपने बच्चों को सामान्य संस्कार भी नहीं दे सकते वे उनके शत्रु हैं।
अतः बच्चों को धार्मिक व सामाजिक संस्कार दे कर चरित्रवान बनाना होगा तभी उनका भविष्य उज्ज्वल बन सकेगा और उनके कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा।
ओऽम् शांति सर्व शांति!!
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