जो ज्ञान मोक्ष-मार्ग की ओर लगा दे, वही सच्चा ज्ञान है
मुनि श्री विरंजन सागर जी महाराज
जो ज्ञान मोक्ष-मार्ग की ओर लगा दे, वही सच्चा ज्ञान है
महानुभावों! जो ज्ञान हमें मोक्ष-मार्ग की ओर लगा दे और कुमार्ग से हटा दे, वही सच्चा ज्ञान है। जो व्यक्ति अपनी आत्मा में ज्ञान का दीपक जला लेते हैं, उनका नर-जन्म सार्थक हो जाता है। मुनि श्री कहते हैं कि सच्चा ज्ञान सुख-प्राप्ति का एकमात्र साधन है। संसार में इसके अतिरिक्त सुख पाने का और कोई माध्यम नहीं हो सकता। सच्चे ज्ञान को संसार में सबसे पवित्र कहा गया है। ज्ञानी व्यक्ति जहाँ भी रहे, उसे सुख व सम्मान की प्राप्ति होती है। इसके विपरीत अज्ञानी हर स्थान पर दुःखी व तिरस्कृत होता है। ज्ञानी नरक में रहकर भी कर्म-फल भोगता है पर दुःख की अनुभूति करके नहीं बल्कि समता भाव से, लेकिन अज्ञानी व्यक्ति स्वर्ग में रहकर भी ईर्ष्यालु प्रवृत्ति के कारण दुःखी ही रहता है।
आगे मुनि श्री ने कहा कि अज्ञान या मिथ्या ज्ञान की उपासना करने वाले अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकते जबकि ज्ञानी अपने ज्ञान का आश्रय लेकर क्षण भर में ही कर्मों की जंजीरों को काटने में समर्थ हैं। हित की प्राप्ति और अहित का परिहार करना ही ज्ञान का सर्वोत्तम फल है।
अतः अपने कल्याण के लिए सभी को सम्यक् ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। मुनि श्री कहते हैं कि मनुष्य जन्म पाकर भी जो ज्ञानार्जन न करे वह सबसे बड़ा मूर्ख है। ज्ञानी जीव क्षण भर में समस्त कर्मों को काट सकता है पर अज्ञानी जीव की हज़ारों वर्षों तक की जाने वाली तपस्या भी सम्यक् ज्ञान के बिना कर्म-बेड़ी को काटने में निष्फल हो जाती है।
जब तक उपार्जित कर्मों की निर्जरा नहीं होगी तब तक मोक्ष-मार्ग प्रशस्त नहीं हो सकता। आगे मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य जन्म की सार्थकता केवल ज्ञान-प्राप्ति से ही है, धन-प्राप्ति से नहीं। धन तो एक वेश्या भी संचित कर सकती है पर क्या वह कल्याण-मार्ग पर चल सकती है? हमारे मानव जीवन की सफलता इसी में है कि हम गुरु द्वारा दिए गए ज्ञान-मार्ग पर चलकर अपनी आत्मा का कल्याण करें और मोक्ष-पद को प्राप्त करें।
ओऽम् शांति सर्व शांति!!
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