संसार में कोई भी विद्या गुरु के बिना प्राप्त नहीं होती

मुनि श्री विरंजन सागर जी महाराज

संसार में कोई भी विद्या गुरु के बिना प्राप्त नहीं होती

महानुभावों! संसार में कोई भी विद्या गुरु के बिना प्राप्त नहीं होती। प्रत्येक विद्या की प्राप्ति में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप में गुरु का सहयोग अवश्य रहता है। कोई अनिष्णात डॉक्टर केवल पुस्तक पढ़ कर ऑपरेशन नहीं कर सकता। इसी प्रकार केवल सिद्धांतों को पढ़कर आत्मा का उपचार नहीं हो सकता। गुरु के निर्देश के बिना साधना करना अंधे और बेलगाम घोड़े की सवारी करने जैसा खतरनाक और हानिकारक है।

भौतिक विद्या के सिद्धांत पुस्तकों द्वारा पढ़े जा सकते हैं किन्तु उनका प्रयोग अनुभवी गुरु के निर्देशन में ही सीखा जा सकता है। अध्यात्म विद्या तो जीवन की विद्या है। इसका प्रत्यक्ष परिचय भी जीवन से ही प्राप्त होता है और इसे जीवन में ही अपनाया जाता है। आत्मा का ऑपरेशन तो स्वयं के जीवन की प्रयोगशाला में स्वयं को ही करना होगा। अतः स्वानुभवी सिद्ध गुरु ही इस विद्या का निर्देशन कर सकते हैं। 

मुनि श्री कहते हैं कि जैसे इस जगत में अग्नि के संयोग से सोना शुद्ध हो जाता है वैसे ही योगीश्वरों की संगति रूपी अग्नि के संयोग से ध्यानी-मुनि अपने मन की शुद्धि को प्राप्त होता है। जो सत्पुरुष गुरुजनों की उपासना करते हैं वे तप करें अथवा न करें, किन्तु दुःख रूपी जंगल को पार करके उत्तम गति को अवश्य प्राप्त कर लेते हैं।


ओऽम् शांति सर्व शांति!!

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