संसार की कोई भौतिक वस्तु मोक्ष-मार्ग में कल्याणकारी नहीं है
मुनि श्री विरंजन सागर जी महाराज
संसार की कोई भौतिक वस्तु मोक्ष-मार्ग में कल्याणकारी नहीं है
महानुभावों! संसार की कोई भौतिक वस्तु मोक्ष-मार्ग में कल्याणकारी नहीं है। आत्म-कल्याण करना है तो शरीर से भी ममत्व छोड़ना परम आवश्यक है। जिसने शरीर के मोह को त्याग कर अपनी आत्मा की ओर दृष्टि कर ली, वही परमात्मा बन गया। सारा तप अंतरंग शुद्धि के लिए किया जाता है, मात्र नग्न हो जाने से कल्याण होने वाला नहीं है। यदि अंतरंग में किसी के परिणाम शुद्ध, निर्मल नहीं हैं तो वह मनुष्य पशु के समान है।
आगे मुनि श्री बताते हैं कि मात्र शास्त्र ज्ञान हो जाने से मोक्ष संभव नहीं है। जिस प्रकार भव्यसेन मुनि को बारह अंग, चौदह पूर्व का ज्ञान था पर उनका आगम में विश्वास नहीं था। अतः वे संसार में ही विचरण करते रहे। ठीक इसके विपरीत शिवभूति मुनि को शास्त्र का ज्ञान बिल्कुल भी नहीं था पर उनके भाव पूर्णतः विशुद्ध थे अतः उन्हें मुक्ति-सुख प्राप्त हुआ।
इससे स्पष्ट है कि जिनके परिणाम (भाव) शुद्ध, निर्मल होते हैं, उनका ही नग्न रूप सार्थक है। मान-कषाय से युक्त साधु का कल्याण कदापि नहीं हो सकता। अतः हम सभी को पर वस्तु से ममत्व त्याग कर समता भाव धारण करना चाहिए। मुनि श्री कहते हैं कि वस्त्र त्याग करने मात्र से हमारे कर्म कटने वाले नहीं हैं। सर्वप्रथम हमें अपने अंतरंग को परिशुद्ध करना होगा।
घर है तेरा सिद्धशिला, जग नहीं है तेरा देश।
जग की ममता त्याग कर, पहुँचो अपने देश।।
ओऽम् शांति सर्व शांति!!
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