जोड़ने से तोड़ना सरल है

मुनि श्री विरंजन सागर जी महाराज

जोड़ने से तोड़ना सरल है

महानुभावों! क्या आप पेड़ से टूटे हुए पत्ते को फिर से शाखा पर जोड़ सकते हैं? क्या आप टूटे हुए काँच को फिर से जोड़ सकते हैं? यह एक सर्वमान्य तथ्य है कि तोड़ना आसान है और जोड़ना कठिन।

अंगुलिमाल नाम का एक बहुत खूंखार डाकू था। वह लोगों को मारकर उनकी अंगुलियां काट लेता था और उनकी माला बना कर पहनता था। उसका नाम सुनते ही लोगों के प्राण सूख जाते थे। शाम होते ही नगर के लोग अपने-अपने घरों में दुबक कर बैठ जाते थे। एक बार उस नगर में गौतम बुद्ध का आगमन हुआ। लोगों ने गौतम बुद्ध से कहा कि भगवन्! यहाँ से चले जाएं। इस नगर में अंगुलिमाल का आतंक छाया हुआ है।

बुद्ध के पास पवित्र आत्मा की शक्ति थी। उन्होंने वहाँ से जाने के लिए मना कर दिया। डाकू अंगुलिमाल ने अपने आतंक से गौतम बुद्ध को आतंकित करने के लिए उनको भी मारने की योजना बनाई और चला उन्हें धमकाने कि आज मैं तुम्हें जान से मार डालूँगा। लेकिन यह क्या? अंगुलिमाल जैसे ही बुद्ध के पास पहुँचा, उनकी सौम्य मुद्रा को देखकर उसके मन के सभी पाप पलायन कर गए।

बुद्ध उसके मन की बात समझ गए। उन्होंने जान लिया कि यह सही समय है जब उसका मन परिवर्तन किया जा सकता है। बुद्ध ने कहा कि तुम्हें मेरी जान लेने से पहले मेरी एक बात माननी होगी। जाओ, सामने वाले पेड़ से एक पत्ती तोड़ कर ले आओ। अंगुलिमाल गया और एक पत्ती तोड़ कर ले आया। बुद्ध ने पुनः कहा कि जाओ, अब इसे वहीं जोड़ कर आओ।

अब तो अंगुलिमाल को बोलना ही पड़ा कि ऐसा कैसे हो सकता है? जो एक बार टूट गया वह जुड़ कैसे सकता है? तोड़ना सरल है और जोड़ना कठिन। बुद्ध ने कहा कि अब तक तो तुमने जीवन में तोड़ना ही सीखा है, अब जोड़ना सीखो; प्रेम से, सेवा से सब को एक दूसरे से जोड़ा जा सकता है।

डाकू अंगुलिमाल का मन पश्चाताप से भर गया। उसे जीवन का ऐसा बोध मिला जिसने उसे डाकू से साधु बना दिया।


ओऽम् शांति सर्व शांति!!

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