यह जीवन है दो पल का
मुनि श्री विरंजन सागर जी महाराज
यह जीवन है दो पल का
यदि हम ऐसा कहते हैं कि यह जीवन पल दो पल का है, तो यही शाश्वत सत्य है। इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं है। हमारे जीवन का एक-एक पल अनमोल है।
हमें जीने के लिए दो पल मिले थे पर हमने जीवन के दोनों पल भोग-विलास में बिता दिए। जो पाप-पुण्य हमारी आत्मा के साथ गठरिया में बांध कर लाए थे, उनका फल भोग लिया। नए पुण्य का संचय किया नहीं और आयु समाप्त हो गई। यदि उनमें से एक पल भी धर्म-ध्यान में लगा लेते तो यूँ खाली हाथ न जाना पड़ता। कुछ पुण्य के काम कर लेंगे तो इस भव में भी सुख प्राप्त होगा और अगले भव के लिए भी अपनी गाँठ में कुछ पुण्य बांध कर ले जा सकेंगे।
कहा भी है -
यह जीवन पल दो पल का, रे मन।
आज प्रभु का सिमरण कर ले, नहीं भरोसा कल का।
इन सांसों का कोई भरोसा नहीं है। न जाने कब, कहाँ, किन परिस्थितियों में हमारा साथ छोड़ दे और जीवन समाप्त हो जाए। फिर तो यह आत्मा आपके शरीर को इसी प्रकार छोड़ कर चली जाएगी, जैसे साँप अपनी केचुली छोड़ कर चला जाता है।
परिवार भी तभी तक पास आता है, जब तक शरीर में प्राण हैं। निष्प्राण होते ही शरीर को घर से बाहर निकालने की तैयारी हो जाती है क्योंकि अब वह किसी काम का नहीं रहा।
बारह भावना में कहा गया है -
‘कमला चलत न पैंड जाय, मरघट तक परिवारा।
अपने अपने सुख को रोवे, पिता पुत्र दारा।’
इसका अर्थ यह है कि आपकी पत्नी आपका साथ घर की चौखट तक देगी और परिवार के सदस्य श्मशान घाट तक ले जाकर चिता में अग्नि देने तक साथ रहेंगे। पिता, पुत्र और पत्नी आपके चले जाने से नहीं रोते अपितु आपके जाने के बाद उनको मिलने वाले सुख छिन जाएंगे, इसलिए आसूँ बहाते हैं।
जब तक शरीर में प्राण हैं, तब तक सोचने की आवश्यकता है कि आपने अपने दो पल के जीवन में क्या खोया है और क्या पाया है? अभी भी समय है। समय रहते सच्चे देव, गुरु, शास्त्र पर श्रद्धा कर लो तो आपको सब कुछ मिल सकता है।
अन्यथा कहा गया है -
‘जिस जिस को तू अपना समझे, वो सब तुझसे दूर है।
फिर क्यों बांधे पाप गठरिया, चेतन क्यों मज़बूर है।’
जीवन के इन दो पलों को गुरु-चरणों में बैठ कर सफल बना लो। इसी मंगल भावना से मैं प्रत्येक पाठक से निवेदन करना चाहूँगा कि इस छोटी-सी ज़िन्दगी के अमूल्य पलों को विषय-भोगों में व्यर्थ न गंवाएं और दुनिया के सामने ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करें कि आपके जाने के बाद भी लोग आपको याद करें और आपके आचरण का अनुसरण करें। जीवन नष्ट हो सकता है, पर आत्मा अमर है। आपके जीवन के ये दो पल आपके साथ-साथ अन्य लोगों के लिए भी आदर्श बन सकते हैं।
ओऽम् शांति सर्व शांति!!
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