ऊँचा उठना है तो नीचे वाले को देखो
मुनि श्री विरंजन सागर जी महाराज
ऊँचा उठना है तो नीचे वाले को देखो
हर व्यक्ति अपने जीवन को पावन और पुनीत बनाना चाहता है। उसके लिए सबसे पहला कदम है - अपने आचरण और अपने सोचने-विचारने के ढंग को बदलना। हम आज भी पुराने, रूढ़ियों से चलते आ रहे आचरण को अपनाए हुए हैं। उसी के अनुसार सोचते हैं और उसी के अनुसार सबके साथ व्यवहार करते हैं।
यदि हम स्वयं को ऊँचाइयों पर पहुँचाना चाहते हैं तो संकीर्ण मानसिकता को छोड़कर आत्म-हित का चिंतन करना चाहिए।
हमें दूसरे के सुख को देखकर दुःखी नहीं होना है अपितु दूसरे के दुःख को सुख मे परिवर्तित करने का प्रयत्न करना है। यदि हमारे भीतर संवेदना का भाव प्रगट हो जाए तो हम कभी दुःखी नहीं हो सकते।
अपनी विचारधारा को बदलो। यदि हमारा पड़ोसी सुखी है तो हमें आनन्द का अनुभव होना चाहिए न कि ईर्ष्या का। प्रत्येक व्यक्ति अपने पुण्य से सुख भोग रहा है और पाप के परिणाम से दुःख पा रहा है।
यदि आप सुख पाना चाहते हैं तो अपने पुण्य को बढ़ाने में लग जाओ ताकि स्वयं भी सुखी रह सको और अपने से निचले स्तर का जीवन जीने वालों को भी धर्म के मार्ग पर चला सको।
ये पुण्य-कार्य, पूजा-पाठ तुम्हें इस जीवन में ऊँचाइयाँ प्रदान करेंगे और अगले जन्म के लिए अच्छी गति-बंध का कारण बनेंगे।
ओऽम् शांति सर्व शांति!!
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