भावनाः संसार-वृद्धि का कारण

मुनि श्री विरंजन सागर जी महाराज

भावनाः संसार-वृद्धि का कारण

हमारे जीवन की कहानी विसंगतियों से भरी हुई है जो हमारे चारों ओर तनावपूर्ण वातावरण के निर्माण का कारण बनती है। हम ऐसे वातावरण में अपना जीवन व्यतीत करने के लिए विवश हो गए हैं लेकिन जीवन में समस्याओं से पूर्णतया मुक्त होना भी सम्भव नहीं है।

हमें इन सारी समस्याओं के बीच में रहकर ही आनन्द की अनुभूति और शान्ति की प्राप्ति करने के लिए प्रशस्त जीवनयापन की साधना करनी होगी। हमारी गौरवशाली भारतीय संस्कृति का इतिहास शांति प्रदान करने वाली नाना प्रकार की सूक्तियों और नीति वाक्यों से भरा हुआ है।

ये सूत्र वाक्य केवल सुनने के लिए नहीं हैं अपितु हमें उन आदर्शों पर चलने की प्रेरणा देते हैं ताकि हमारा जीवन भी तनावमुक्त हो सके। महापुरुषों ने स्वयं अपने अनुभव से हमें इन नीतियों का ज्ञान दिया और अपने आचरण से हमारे समक्ष आदर्श स्थापित किया है।

उन्होंने अपने जीवन का भी उत्कर्ष किया है और हमें भी पग-पग पर ऐसे सदाचरण के लिए प्रेरित करते हैं। वास्तव में जीवन का निर्माण करना हमारे ही हाथ में है।

एक मकड़ी पतले-पतले तन्तुओं से अपने लिए ऐसा महल तैयार करती है कि आज तक कोई बड़े से बड़ा वैज्ञानिक भी ऐसा निर्माण करने में सफल नहीं हो सका। मकड़ी को इतना महीन ताना-बाना बुनना तो आता है पर उसमें से निकलना नहीं आता। इसका परिणाम यह निकलता है कि वह उसी में फंसकर अपने जीवन का अंत कर बैठती है।

इसी प्रकार आप भी अपने चारों ओर अच्छे-बुरे कार्यों के माध्यम से संसार का ऐसा जाल बुनना आरम्भ करते हैं कि फिर उसमें ही उलझ कर रह जाते हैं। संस्कृत में एक सूक्ति कही गई है - “भावना भवनाशिनी।” इसका अर्थ है कि हमारी भावना ही भव का नाश करा सकती है अर्थात् संसार से मुक्ति दिलाने वाली है। इसके विपरीत भावना ही भववर्धिनी है।

भगवान महावीर ने कहा है कि आपके भाव ही संसार के दुःखों को बढ़ाते हैं और आपके भाव ही कर्मों से मुक्त करा सकते हैं। कहते हैं कि जैसी करनी, वैसी भरनी। जैसे हमारे विचार होते हैं, वैसे हमारे कर्म होते हैं और उनका फल भी वैसा ही मिलता है। इस प्रकार भावों से ही सम्पूर्ण जीवन का क्रम चलता रहता है। भावों के अनुसार हमारा गतिबंध और कर्मबंध होता है।

अतः जीवन सुन्दर बनाना है तो अपने भावों को उत्कृष्ट बनाओ। यही भावों की श्रेष्ठता, पुण्य का बंध कराएगी और उसका फल मोक्ष के रूप में मिलेगा। जीवन के दर्शन को समझें और जानें। इससे आपका जीवन सुन्दर और पावन बनेगा और एक दिन भव-भव के दुःखों का अंत कर देगा।


ओऽम् शांति सर्व शांति!!

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