अध्ययन, परीक्षा और परीक्षा-परिणाम
मुनि श्री विरंजन सागर जी महाराज
अध्ययन, परीक्षा और परीक्षा-परिणाम
यदि हम शाश्वत सुख चाहते हैं तो हमारा अध्ययन भी उसी स्तर का होना चाहिए। अब तक हम पर का चिंतन करते रहे और भौतिक सुखों में ही सुख की खोज करते रहे। अब हम स्व का चिंतन करेंगे और शाश्वत सुख को प्राप्त करेंगे।
एक होता है - पहले सुख, बाद में दुःख। वह है - पंच इन्द्रियों के विषय-भोग का सुख।
दूसरा है - पहले दुःख, बाद में सुख। वह है - पंच इन्द्रियों के विषय भोग के त्याग का सुख।
तीसरा है - पहले भी सुख, बाद में भी सुख। वह है - धर्म की राह पर चल कर निज और पर के ज्ञान का सुख।
केवल निज आत्मा का ज्ञान होने से ही अध्ययन की पूर्णता नहीं हो जाती, उसकी परीक्षा में जो सफल होता है वही सच्चा ज्ञानी कहलाता है। कोई मजबूरी वश परीक्षा में असफल हो जाए तो क्या तुम उसे सफल मान लोगे? नहीं न!
परीक्षा में मजबूरी नहीं मजबूती देखी जाती है।
कितने घंटे मिलते हैं परीक्षा में?
तीन!
हाँ, तुमने तीन घंटे में ही परीक्षा पास करने के लिए स्वयं की योग्यता सिद्ध करनी है।
पहला घंटा मिला बचपन का। अरे! अभी तो खेल का मजा लेने दो। दो घंटे बाकी हैं, बहुत समय पड़ा है धर्म ध्यान करने को। समय के सदुपयोग का विवेक ही नहीं था।
चलो, बीत गया एक घंटा तो। परीक्षक ने दूसरा घंटा शुरू होने का संकेत दे दिया। बचपन जवानी में बदल गया। मन भटक गया भोग-विलास में। पुण्य तो क्या कमाना था उल्टे पाप ही कमा कर बैठ गए।
जैसे ही तीसरा घंटा शुरू हुआ तो होश उड़ गए। मैने तो अभी तक कुछ भी नहीं लिखा। मेरा जीवन कोरा था और कोरा ही रह गया। बुढ़ापे ने दस्तक देनी शुरु कर दी। शरीर अक्षम होने लगा। हाय! अब क्या करूँ? परीक्षक ने तो तीन घंटे का समय नियत किया हुआ है। समय समाप्त होते ही मेरी पुस्तिका (आयु) छीन ली जाएगी। मुझे तो एक पल भी अतिरिक्त नहीं मिलने वाला।
जैसा अध्ययन वैसी परीक्षा और जैसी परीक्षा वैसा ही परीक्षा-फल।
अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।
लेकिन जब जाग जाओ तभी सवेरा हो सकता है।
बस! गुरु कहते हैं कि समय रहते सचेत हो जाओ। जाग जाओ और कर लो अपना, अपनी आत्मा का कल्याण। फिर यह मानव जन्म इतनी आसानी से मिलने वाला नहीं।
अरे! गुरु तो Traffic नियंत्रक की तरह होते हैं। चौराहे पर आने वाले हर प्राणी को रास्ता बताते हैं कि यह रास्ता नरक गति व तिर्यंच गति की ओर जाता है और यह रास्ता देव गति व मनुष्य गति की ओर जाता है। वे तो पंचम गति का भी रास्ता बताते हैं और वह है - मोक्ष का मार्ग। उसके संकेत को समझो और सही रास्ते पर अपने कदम बढ़ाओ।
ओऽम् शांति सर्व शांति!!
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